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Hindi News ›   India News ›   Ram Temple trust 15 members list, one seat set aside for Dalit

राम मंदिर ट्रस्ट गठित : के परासरन होंगे अध्यक्ष, नौ स्थायी और छह नामित सदस्य शामिल

Thu, 06 Feb 2020 04:58 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 06 Feb 2020 04:58 AM IST
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Ram Temple trust 15 members list, one seat set aside for Dalit
राम मंदिर ट्रस्ट गठित - फोटो : Amar Ujala Graphics

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट बनाने का एलान किया। जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि इस ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे जिसमें एक दलित समाज का सदस्य होगा। इसके चार घंटे बाद ट्रस्ट से जुड़े 15 सदस्यों के बारे में जानकारी सामने आई। 

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अयोध्या विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य वकील रहे 92 वर्षीय के परासरन को राम मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाया गया है। परासरन के अलावा इस ट्रस्ट में एक शंकराचार्य समेत पांच सदस्य धर्मगुरु ट्रस्ट में शामिल हैं। साथ ही अयोध्या के पूर्व शाही परिवार के राजा विमलेंद्र प्रताप मिश्रा, अयोध्या के ही होम्योपैथी डॉक्टर अनिल मिश्रा और कलेक्टर को ट्रस्टी बनाया गया है। 
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पहले जानकारी सामने आई थी कि चार शंकराचार्यों को इस ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा, लेकिन सरकार ने ट्रस्ट में सिर्फ प्रयागराज के ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज को शामिल किया गया है। इसके अलावा ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी स्थान दिया गया है, लेकिन अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्ट की मीटिंग में वोटिंग का अधिकार नहीं होगा। 

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य

के परासरन
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. परासरन ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे। उन्होंने रामलला विराजमान की ओर से अयोध्या मामले में लंबे समय तक पैरवी की। 92 वर्षीय परासन ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर बहस की जबकि उन्हें कुर्सी पर बैठने अनुमति दी गई थी। वह रामसेतु समुद्रम परियोजना पर भी मुकदमा लड़ चुके हैं। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के वकील रहे परासरन को भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है। राम मंदिर मामले के दौरान उन्होंने स्कंध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर का अस्तित्व साबित करने की कोशिश की।

डॉ. अनिल कुमार मिश्र
पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर अनिल कुमार मिश्र फैजाबाद की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं। आंबेडकर नगर जिले के पहतीपुर के पतौना गांव के मूल निवासी अनिल राम मंदिर आंदोलन के दौरान विनय कटियार के साथ जुड़े थे। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े। मौजूदा वक्त में वह संघ के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह हैं। वह उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार पद पर भी कार्यरत हैं।

विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र
अयोध्या राज परिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है। रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और समाजसेवी मिश्र ने 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था।

कामेश्वर चौपाल
दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कामेश्वर चौपाल को भी जगह दी गई है। 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी। संघ ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया है। वह 1991 में रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं।

महंत दिनेंद्र दास
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़ा की अयोध्या बैठक के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास को भी ट्रस्ट में जगह मिली है। सूत्रों के मुताबिक, दास बैठक में हिस्सा तो लेंगे लेकिन उन्हें मतदान का हक नहीं होगा।

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज
बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य। इनके शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर विवाद भी हुआ था। ज्योतिष मठ की शंकराचार्य की पदवी को लेकर द्वारका पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने हाईकोर्ट में मामला दाखिल किया था।

जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज  
कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं। दिसंबर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के निधन के बाद उन्होंने यह पदवी संभाली।

युगपुरुष परमानंद जी महाराज
अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद जी महाराज भी ट्रस्ट में शामिल किए गए हैं। उनकी वेदांत पर 150 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया था।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज
महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्मे स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज रामायण, श्रीमद् भागवत गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का देश विदेश में प्रवचन करते हैं। वह राज्य के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हैं

ये भी होंगे ट्रस्ट में
  • बोर्ड ऑफ ट्रस्टी द्वारा नामित दो सदस्य, दोनों हिंदू धर्म से होंगे।
  • केंद्र सरकार द्वारा नामित एक हिंदू धर्म का प्रतिनिधि जो केंद्र के अंतर्गत आईएएस अधिकारी होगा। यह संयुक्त सचिव के पद से नीचे का व्यक्ति नहीं होगा। यह एक पदेन सदस्य होगा।
  • राज्य सरकार द्वारा नामित एक हिंदू धर्म का प्रतिनिधि जो यूपी सरकार के अंतर्गत आईएएस अधिकारी होगा। यह व्यक्ति राज्य सरकार के सचिव के पद से नीचे नहीं होगा। यह भी पदेन सदस्य होगा।
  • अयोध्या के जिलाधिकारी पदेन ट्रस्टी होंगे। वह हिंदू धर्म को मानने वाले होंगे। अगर किसी कारण से मौजूदा कलेक्टर हिंदू धर्म के नहीं हैं, तो अयोध्या के एडिशनल कलेक्टर (हिंदू धर्म) पदेन सदस्य होंगे।
  • राम मंदिर विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों के चेयरमैन की नियुक्ति ट्रस्टियों का बोर्ड करेगा। उनका हिंदू होना जरूरी है।

30 साल पहले एक दलित ने रखी थी रामजन्म भूमि शिलान्यास की पहली ईंट

30 साल पहले केंद्र की तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की अनुमति के बाद 9 नवंबर 1989 को प्रस्तावित राममंदिर की नींव पड़ी थी। शिलान्यास के लिए पहली ईंट विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन संयुक्त सचिव कामेश्वर चौपाल ने रखी थी। चौपाल का नाता बिहार से है और वे दलित समुदाय से आते हैं।

रौनाही में मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देगी योगी सरकार

पीएम के एलान के कुछ देर बाद ही यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक हुई। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि अयोध्या मुख्यालय से 18 किमी दूर ग्राम धानीपुर, तहसील सोहावल रौनाही थाने के 200 मीटर के पीछे पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। यह जमीन लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर अयोध्या से करीब 22 किमी पहले है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड को यह जमीन पांच एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए दी जा रही है। अब बोर्ड के ऊपर है कि वह इस जमीन का क्या करता है।

सुन्नी वक्फ मुस्लिमों का नुमाइंदा नहीं: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

हम अयोध्या में मस्जिद के बदले कोई और जमीन नहीं लेंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड मुसलमानों का नुमाइंदा नहीं है। वह सरकार की संस्था है। बोर्ड अगर जमीन लेता है तो इसे मुसलमानों का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। -मौलाना यासीन उस्मानी, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य

शियाओं को जमीन मिलती तो एक और राममंदिर निर्माण: शिया वक्फ बोर्ड


राममंदिर के लिए ट्रस्ट बनाकर हुकूमत ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है और हिंदुओं को उनका हक राम मंदिर अयोध्या में मिला है। शियाओं को मिलने वाली जमीन आज सुन्नियों को मिल रही है। अगर यह जमीन शिया वक्फ बोर्ड को मिलती तो वहां शिया वक्फ बोर्ड एक और राम मंदिर का निर्माण कराता। -वसीम रिजवी, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष

संत समाज खुश, कहा-नृत्य गोपाल दास हो सकते हैं ट्रस्ट के अध्यक्ष

राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास वेदांती ने ट्रस्ट के एलान के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि रामनवमी पर पीएम मोदी इसका शिलान्यास करेंगे। वेदांती ने कहा कि महंत नृत्यगोपाल दास नए ट्रस्ट के अध्यक्ष हो सकते हैं। वेदांती ने कहा कि मंदिर का आकार व परिसर बड़ा होगा और मंदिर विशाल बनेगा। वहीं, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि ट्रस्ट का एलान हो गया है। सब संतुष्ट हैं कोई विवाद नहीं। राम का काम है। मंदिर निर्माण भी सब चाहते हैं, इस पर सब एक हैं। प्रभु राम के काम में विरोध का सवाल ही नहीं।

ट्रस्ट में दलित को स्थाई सदस्य बनाने को बताया ऐतिहासिक

अखिल भारतीय संत समिति ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार द्वारा  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के गठन का स्वागत किया है। समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रनंद सरस्वती ने इस ट्रस्ट में दलित बिरादरी के एक व्यक्ति को स्थाई सदस्य के तौर पर शामिल करने के फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के निर्माण के साथ ही राम मंदिर निर्माण की अब सारी बाधा दूर हो गई है।

महामंत्री ने कहा कि दलित समाज को न्यास में स्थायी प्रतिनिधित्व देना अत्यंत सराहनीय क़दम है हम इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं। ईश्वर के दरबार में कोई भेद नहीं है और इस घोषणा से हिन्दू समाज के मध्य सौहार्द और प्रगाढ़ होगा। मंदिर निर्माण के लिए जिस प्रस्तावित नक्शे को हृदय से लगा कर देशवासियों ने कारसेवा की, करोड़ों लोगों ने सवा-सवा रुपये की दक्षिणा दी और करोड़ों गाँवों से एक-एक ईंट अयोध्या भेजी गई, उसी नक्शे के आधार पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में बनाना चाहिए।

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