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रामनवमी हिंसा में दंगाइयों ने इमाम के बेटे को मारा, बोले- बदला लेने की बात की तो छोड़ देंगे शहर

Sat, 31 Mar 2018 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Updated Sat, 31 Mar 2018 12:06 AM IST
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Ram Navami communal clashes: A Moving Call For Peace From Imam He Lost His Son
इमाम
रामनवमी के अवसर पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अपना बेटा खोने वाले एक इमाम ने बदला लेने से इनकार कर मानवता और सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश की। स्थानीय नूरानी मस्जिद के इमाम मौलाना इम्दादुल रशीदी ने बदला लेने पर उतारू भीड़ को यह कहकर शांत कराया कि अगर किसी ने खून-खराबा की बात की तो वह मस्जिद और शहर छोड़ कर चले जाएंगे। उनकी शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील के चलते इलाके में स्थिति सामान्य होने लगी है। 
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इमाम का 16 वर्षीय छोटा बेटा हफीज सबीतुल्ला मंगलवार को भड़की हिंसा के दौरान लापता हो गया था। अगले दिन उसका शव मिला। उसके शरीर और सिर पर गहरी चोट के निशान थे। बृहस्पतिवार को ईदगाह मैदान में शव को दफनाने के दौरान हजारों लोग जुटे। भीड़ में शामिल लोगों के सिर पर बदला लेने का भूत सवार था।
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इमाम ने मौके की नजाकत को भांपते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इमाम ने कहा कि उन्होंने अपना बेटा खोया लेकिन इसे मुद्दा मत बनाइए। वह नहीं चाहते कि हिंसा और दंगे की आग में उनकी तरह ही किसी अन्य परिवार को अपने प्रियजन की मौत का गम झेलना पड़े। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर वे उनसे मोहब्बत-प्यार करते हैं तो बदला लेने की बात भूल जाएं। 
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हर तरफ हो रही प्रशंसा

Ram Navami communal clashes: A Moving Call For Peace From Imam He Lost His Son
पश्चिम बंगाल
इमाम की चौतरफा प्रशंसा हो रही है। लोगों का कहना है कि उत्तेजित युवकों को शांत कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। ऐसा नहीं होता तो आसनसोल भयावह सांप्रदायिक दंगे की चपेट में आ जाता। इमाम ने शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को भी पूरी मदद की। 

सही संदेश देना मेरा कर्तव्य

मैं पिछले 30 साल से इमाम हूं। लोगों को शांति और भाईचारे का सही संदेश देना मेरा कर्तव्य है। इसलिए सांप्रदायिक सद्भाव और शहर में शांति बहाल करने के लिए मैंने लोगों से निजी गम भुलाकर लोगों से शांति रहने को कहा। आसनसोल के लोग ऐसे नहीं हैं। इलाके में भड़की हिंसा एक सुनियोजित साजिश है। 

दिल्ली के यशपाल सक्सेना ने भी पेश किया था उदाहरण

फरवरी में एक मुस्लिम परिवार द्वारा बेटे की हत्या किए जाने पर यशपाल सक्सेना ने भी इसी तरह का उदाहरण पेश किया था। उन्होंने उस वक्त कहा था कि वह भड़काऊ बयान नहीं चाहते हैं। जो हुआ है उसका गहरा दुख है लेकिन वह मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल नहीं चाहते हैं। उनकी किसी धर्म से कोई शिकायत नहीं है। लोग उनका इस्तेमाल सांप्रदायिक तनाव फैलाने में न करें।
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