फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ayodhya Ram Mandir Bhumi Pujan special points dates Time Line

Ayodhya Ram Mandir: खास बातें और तारीखें, पहली बार ब्रिटिश शासनकाल में 200 साल पहले उठा था मुद्दा

Tue, 04 Aug 2020 02:18 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 04 Aug 2020 02:18 PM IST
विज्ञापन
Ayodhya Ram Mandir Bhumi Pujan special points dates Time Line
अयोध्या राम मंदिर: भूमि पूजन के लिए सजधज कर तैयार - फोटो : amar ujala

कई वर्षों की जद्दोजहद, संघर्ष और आंदोलन के बाद बुधवार यानि पांच अगस्त को राम मंदिर का भूमिपूजन होने जा रहा है। राम की नगरी अयोध्या भूमि पूजन के लिए पूरी तरह सजधज कर तैयार है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे, जिसके बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो जाएगा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और साथ ही कोरोना संकट के कारण नियमों का ख्याल भी रखा जा रहा है। बहरहाल, हम आपको बता रहे हैं कि 200 साल पहले यह मुद्दा पहली बार कैसे उठा था। साथ ही इस मामले से जुड़ी पूरी टाइमलाइन।

विज्ञापन
 

साल 1813 में पहली बार किया गया था मंदिर को लेकर दावा

ब्रिटिश हुकूमत के वक्त साल 1813 में हिंदू संगठनों ने पहली बार यह दावा किया था कि वर्ष 1526 में जब बाबर आया तो उसने राम मंदिर को तुड़वाकर ही विवादित ढांचे का निर्माण कराया था। उसी के नाम पर विवादित ढांचे को बाबरी मस्जिद नाम से जाना गया। 
विज्ञापन


उस वक्त भी दोनों पक्षों के बीच हिंसात्मक घटनाएं हुई थीं।ब्रिटिश सरकार ने साल 1859 में विवादित जगह पर तार की एक बाड़ बनवा दी। इसके बाद साल 1885 में पहली बार महंत रघुबर दास ने ब्रिटिश शासन के दौरान ही अदालत में याचिका देकर मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहली बार ढांचा साल 1934 में गिराया गया

साल 1934 में विवादित क्षेत्र को लेकर हिंसा भड़की। इस दौरान पहली बार विवादित हिस्सा तोड़ा गया। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने तब इसकी मरम्मत कराई। इसके बाद 23 दिसंबर 1949 को हिंदुओं ने ढांचे के केंद्र स्थल पर रामलला की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना शुरू की। इसके बाद से ही मुस्लिम पक्ष ने यहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया और वह कोर्ट चला गया।

आजाद भारत में ऐसे बना बड़ा मुद्दा

साल 1950 में फैजाबाद की अदालत से गोपाल सिंह विशारद ने रामलला की पूजा-अर्चना करने के लिए विशेष अनुुमति मांगी थी। इसके बाद दिसंबर 1959 में निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल को उसे हस्तांतरित करने और दिसंबर 1961 में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित ढांचे के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर कर दिया। इस तरह आजाद भारत में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनना शुरू हो गया।

विश्व हिंदू परिषद ने भी बनाया मुद्दा

विश्व हिंदू परिषद ने साल 1984 में विवादत ढांचे के ताले खोलने, राम जन्मभूमि को स्वतंत्र कराने और यहां विशाल मंदिर निर्माण के लिए एक अभियान शुरू किया। इस दौरान देशभर में जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। विहिप के साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को हिंदू अस्मिता के साथ जोड़ते हुए संघर्ष शुरू किया।

बाबरी एक्शन कमेटी 1986 में बनाई गई

कोर्ट में चल रहे मामले के दौरान साल 1986 में फैजाबाद जिला न्यायाधीश की ओर से पूजा की इजाजत दी गई तब ताले दोबारा खोले गए। हालांकि इससे नाराज मुस्लिम पक्ष ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित करने का फैसला लिया। 

इसके बाद साल 1992 में 6 दिसंबर को कारसेवकों ने भारी संख्या में अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा एक बार फिर ढहा दिया। इस दौरान भी हिंसा भड़की, देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुए और इसी दौरान अस्थाई राम मंदिर भी बनाया गया। इसके बाद से ही मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने के काम में तेजी भी आई। दिसंबर 1992 में ही लिब्रहान आयोग गठित किया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2002 में सुनवाई शुरू की

अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर साल 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायधीशों की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की। इसके बाद मार्च-अगस्त 2003 में हाईकोर्ट से मिले निर्देश पर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल पर खुदाई की। विभाग ने दावा किया कि खुदाई में विवादित ढांचे के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं।

हाईकोर्ट के फैसले को साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई

साल 2011 में मामले की सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित क्षेत्र को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया। लेकिन यह फैसला सभी पक्षों को स्वीकार नहीं था। ऐसे में फरवरी 2011 में हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तब मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय पीठ में सुनवाई शुरू हुई।

साल 2017 से अब तक मध्यस्थता के सारे प्रयास विफल रहे

साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तो शुरू हो गई, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट से भेजे गए दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हो पाने के कारण यह मामला टलता रहा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता की पेशकश की, जो विफल रही। इसके बाद 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई कर जल्द से जल्द मामले का निपटारा करने की बात कही।

15वीं सदी से चल रहे विवाद का अंत नजदीक

अयोध्या विवाद पर छह अगस्त 2019 से शुरू हुई रोजाना सुनवाई 16 अक्तूबर को खत्म हो गई थी। 15वीं सदी से यह विवाद अब तक चला आ रहा है। हालांकि इसे प्रमुखता से 1813 में पहली बार उठाया गया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2010 में दिए अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया था जिस पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।


इसके बाद इसी मामले में विभिन्न पक्षों की ओर से 14 याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। ऐसे में देखा जाए तो 15वीं सदी से चल रहे इस विवाद का अंत होने को है। 

अयोध्या मामले की टाइमलाइन

1528: बाबर के कमांडर मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया।
1885: महंत रघुबर दास ने फैजाबाद जिला कोर्ट में विवादित भूमि के बाहर मंडप लगाने को याचिका दायर की। याचिका खारिज।
1949: विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के नीचे रामलला की मूर्ति प्रकट हुई।
1950: रामलला की पूजा का अधिकार देने के लिए गोपाल सिंह विषारद ने फैजाबाद कोर्ट में मुकदमा दायर किया।
1950: परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा और मूर्तियों को रखने की लिए फैजाबाद कोर्ट में मुकदमा दायर किया।
1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल पर कब्जे के लिए मुकदमा दायर किया।
1981: यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कब्जे को लेकर मुकदमा दायर किया।
1 फरवरी, 1986: स्थानीय अदालत ने स्थल को हिंदुओं की पूजा के लिए खोलने का आदेश दिया।
14 अगस्त, 1989: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
6 दिसंबर, 1992: विवादित ढांचे को ढहा दिया गया।
अप्रैल 2002: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की।
30 सितंबर, 2010: हाईकोर्ट ने विवादित स्थल को तीन बराबर हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला में बांटने का फैसला सुनाया।
9 मई, 2011: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
8 फरवरी, 2018: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
2019:  सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया।
6 अगस्त, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना मामले की सुनवाई शुरू की।
16 अक्तूबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।

9 नवंबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा: विवादित भूमि पर बनेगा मंदिर, मुस्लिम पक्ष को कहीं और मिलेगी जमीन



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed