राज्यसभा चुनाव में मजबूत हुई भाजपा, कांग्रेस की किरकिरी
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सात राज्यों में राज्यसभा की 27 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा मजबूत बनकर उभरी है, जबकि कांग्रेस की खासी किरकिरी हुई है। हरियाणा में विधायकों की बगावत से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार आरके आनंद हार गए और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा जीत गए। पार्टी उम्मीदवार कपिल सिब्बल को भी यूपी में जीतने के लिए खासा जोर लगाना पड़ा। इन चुनावों में भाजपा को 11, समाजवादी पार्टी को सात, कांग्रेस को छह और बसपा को दो सीटें मिली हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है।
उत्तराखंड में कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप टम्टा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अनिल गोयल को हराने में सफल रहे। टम्टा उत्तराखंड से राज्यसभा में पहुंचने वाले पहले दलित नेता हैं। शनिवार को हुए मतदान के बाद सपा के अमर सिंह और बसपा के सतीश चंद्र मिश्र समेत भाजपा के बड़े नेताओं में एम वेंकैया नायडू, बीरेंद्र सिंह, निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं। राज्यसभा में अपनी कमजोर स्थिति के मद्देनजर भाजपा के लिए यह राहत की बात है। कर्नाटक से कांग्रेस के ऑस्कर फर्नांडिस और जयराम रमेश जीतने में सफल रहे हैं।
कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका हरियाणा में लगा जहां इसके 14 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और इस वजह से पार्टी समर्थित उम्मीदवार आर.के. आनंद को हार का सामना करना पड़ा। आनंद को कांग्रेस के विरोधी दल इनेलो ने खड़ा किया था। राज्य के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के 14 वोट खारिज कर दिए गए। इसके बाद मीडिया मुगल सुभाष चंद्रा को विजयी घोषित कर दिया गया। वैसे भी चुनाव से पहले ही इस बात की पूरी चर्चा थी कि भूपिंदर सिंह हुड्डा के समर्थक 17 कांग्रेस विधायक आनंद का समर्थन को तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस झारखंड में भी पस्त हुई है। वहां यह झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार और शिबू सोरेन के पुत्र बसंत सोरेन को जीत दिलाने में नाकाम रही। वहां भाजपा के मुख्तार अब्बार नकवी और महेश पोद्दार जीतने में सफल रहे। झामुमो के एक विधायक अपनी गिरफ्तारी और एक कांग्रेस विधायक गिरफ्तारी के डर से वोट नहीं दे सके।
यूपी में क्रॉस वोटिंग के बावजूद पार्टी अधिकृत प्रत्याशी जीते
यूपी में विधायकों के पाला बदलने और क्रॉस वोटिंग से पैदा हुई सियासी गरमी के बीच हुए मतदान के बावजूद राज्यसभा चुनाव के लिए सभी दलों के अधिकृत प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल के लिए मुकाबले की स्थित बनी लेकिन आखिरकार वह चुनाव जीत गए।
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति महापात्रा चुनाव हार गईं हैं। खुला मतदान होने के कारण राजनीतिक निष्ठाएं बदलने वाले कम से कम 16 विधायकों के नाम सामने आ गए। सपा के 7, बसपा के 2, भाजपा व कांग्रेस के 1-1 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं।
मध्य प्रदेश में भाजपा को तीन में से दो सीटें
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव में भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली है। भाजपा के अनिल दवे और एमजे अकबर निर्विरोध चुने गए, जबकि कांग्रेस के विवेक तनखा को भाजपा समर्थित निर्दलीय विनोद गोटिया से मुकाबला करना पड़ा। तनखा आखिरकार उम्मीद से अधिक वोट हासिल कर जीतने में कामयाब रहे।
राजस्थान में भाजपा का परचम
कांग्रेस झारखंड में भी पस्त
कांग्रेस झारखंड में भी पस्त हुई है। वहां यह झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार और शिबू सोरेन के पुत्र बसंत सोरेन को जीत दिलाने में नाकाम रही। वहां भाजपा के मुख्तार अब्बार नकवी और महेश पोद्दार जीतने में सफल रहे। झामुमो के एक विधायक अपनी गिरफ्तारी और एक कांग्रेस विधायक गिरफ्तारी के डर से वोट नहीं दे सके।
उत्तराखंड से राज्यसभा पहुंचने वाले टम्टा पहले दलित नेता
उत्तराखंड में कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप टम्टा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अनिल गोयल को हराने में सफल रहे। टम्टा उत्तराखंड से राज्यसभा में पहुंचने वाले पहले दलित नेता हैं।
27 सीटों के लिए हुआ घमासान
सात राज्यों के लिए राज्यसभा की 57 सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 30 पर र्निविरोध उम्मीदवार चुने गए थे। 27 सीटों के लिए चुनाव हुए। जिसमें सबसे ज्यादा सीटें भाजपा के पाले में आईं।
कहां कितनी सीटें
उत्तर प्रदेश - 11 सपा - 7 सपा 7, बसपा 2, भाजपा-1 कांग्रेस 1