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UNSC: 'भारत को यूएनएसी में स्थायी सीट न मिलना UN की नैतिक वैधता के लिए सवाल', राजनाथ सिंह ने दोहराई मांग

Tue, 13 Jun 2023 04:51 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 13 Jun 2023 04:51 PM IST
सार

राजनाथ सिंह ने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश  भारत UNSC के स्थायी सदस्य की सीट नहीं पाता है, तो यह संयुक्त राष्ट्र की नैतिक वैधता को कम करता है। इसलिए, अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र के निकायों को और अधिक लोकतांत्रिक बनाया जाए। 
 

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Rajnath singh says Time has come for making UN bodies more democratic and representative of current realities
राजनाथ सिंह ने दोहराई मांग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने के लिए हाल के सालों में भारत सबसे प्रबल दावेदार बनकर सामने आया है। भारत ने लगातार वैश्विक संगठन में अपनी स्थायी सदस्यता की मांग की है। इसी क्रम में एक बार फिर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस मांग को दोहराया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि अब समय आ गया है जब संयुक्त राष्ट्र के निकायों को अधिक लोकतांत्रिक और वर्तमान की वास्तविकताओं का प्रतिनिधि बनाया जाए। 

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भारत को UNSC  में स्थायी सदस्य बनाए जाने की मांग दोहराई
उन्होंने आगे कहा कि जब दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में सीट नहीं मिलती है तो यह “नैतिक वैधता को कमजोर करने” की ओर बढ़ता होता है। वे संयुक्त राष्ट्र (यूएन) शांति स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौके पर राजधानी दिल्ली में आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान, संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर शोम्बी शार्प भी वहां मौजूद थे। उनके सामने राजनाथ सिंह ने कहा कि जब हम अतीत को याद करते हैं, तो हमें भविष्य की ओर भी देखना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पूरे संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र को देखना भी महत्वपूर्ण है। साथ ही इसमें सुधार के लिए क्या किया जा सकता है? इस दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक महत्वपूर्ण सुधार जो हमारे सामने है, वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सहित संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने वाले निकायों को दुनिया की जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के प्रति अधिक चिंतनशील बनाना है।
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राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा बयान
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश  भारत UNSC के स्थायी सदस्य की सीट नहीं पाता है, तो यह संयुक्त राष्ट्र की नैतिक वैधता को कम करता है। इसलिए, अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र के निकायों को और अधिक लोकतांत्रिक बनाया जाए। 

सीडीएस अनिल चौहान भी रहे मौजूद
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे, सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न दूतावासों के रक्षा अताशे भी मौजूद थे।

 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है? 
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र (UN) के छह प्रमुख अंगों में से एक है। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने, महासभा में संयुक्त राष्ट्र के नए सदस्यों के प्रवेश की सिफारिश करने और संयुक्त राष्ट्र में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है।
 
सुरक्षा परिषद की संरचना की बात करें तो इसमें पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और रूस। यह सामूहिक रूप से P5 के रूप में जाने जाते हैं। इनमें से कोई भी प्रस्ताव को वीटो कर सकता है। परिषद के दस निर्वाचित सदस्य भी होते हैं जिनका कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है। निर्वाचित सदस्यों को वीटो शक्ति नहीं दी जाती है।

UNSC में सीट पाने के लिए भारत क्यों बड़ा दावेदार है? 
UNSC का स्थायी सदस्य बनने के इच्छुक सभी उम्मीदवारों में भारत सबसे अधिक मुखर है। भारत आज एक प्रमुख वैश्विक शक्ति केंद्र बन चुका है। भारत की सदस्यता का दावा इन तथ्यों पर आधारित है कि यह संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है, सबसे बड़ा लोकतंत्र है, दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। 
 
साथ ही, भारत जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों और अन्य संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलनों से संबंधित सभी अहम मंचों में सक्रिय रूप से खुद को शामिल करता रहा है। भारत दुनिया के अधिकांश अविकसित और विकासशील देशों के हितों का भी प्रतिनिधित्व करता है। भारत एक देश है जो दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की विचारधारा रखता है।

UNSC में सुधार में भारत के समर्थन और विरोध में कौन-कौन है?
भारत के लिए समस्या यह है कि वह तब तक स्थायी निकाय का हिस्सा नहीं बन सकता जब तक कि इसके सुधारों के लिए पांच स्थायी सदस्यों के बीच आम सहमति नहीं बन जाती। इन सदस्यों के पास वीटो शक्ति है जो UNSC में अन्य देशों के प्रवेश को रोकने की शक्ति प्रदान करती है।

 
UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में से चीन को छोड़कर चार अन्य देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने UNSC में स्थायी सीट के लिए भारत की उम्मीदवारी के लिए द्विपक्षीय रूप से अपना समर्थन दिया है। हालांकि, चीन ने भारत की दावेदारी में हमेशा बाधा डाली है। चीन के करीबी सहयोगी पाकिस्तान, तुर्किये, उत्तर कोरिया और इटली जैसे देश भी UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का विरोध करते रहे हैं।

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