राजस्थान चुनाव : कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के टिकट की मांग, लाइन में लगे प्रत्याशी
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राजनीतिक विशेषज्ञ और ओपिनियन पोल भले ही राजस्थान में भाजपा की जीत की उम्मीद क्षीण बता रहे हों, लेकिन भाजपा के टिकट की मांग कांग्रेस से कहीं ज्यादा है। भाजपा में जहां अब तक सात हजार लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किए हैं, कांग्रेस के अभ्यर्थियों की संख्या महज पांच हजार है। हर विधानसभा सीट के लिए भाजपा के 35 दावेदार हैं, जबकि कांग्रेस टिकट के 25 दावेदार।
राजस्थान के भाजपा प्रभारी और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि पार्टी के टिकट के लिए होड़ से पता चलता है कि कौन सी पार्टी ज्यादा लोकप्रिय है। जाहिर है जिस दल की जीत की संभावना ज्यादा होती है, ज्यादातर लोग उसी के टिकट पर लड़ना चाहते हैं।
जमीनी स्तर से फीडबैक ले रही भाजपा
भाजपा ने इस बार अपने उम्मीदवार चुनने के लिए जमीनी स्तर से फीडबैक मंगाया है। हर सीट पर प्रत्याशी के चयन के लिए जिला स्तर के पदाधिकारियों के अलावा ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं की राय भी मायने रखेगी। इसीलिए उम्मीदवारों को लग रहा है कि करीब आधे मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं।
दरअसल, पिछले चुनाव में अधिकतर उम्मीदवार वसुंधरा राजे की पसंद के थे। तीन चौथाई बहुमत के साथ जीतने के बाद मुख्यमंत्री राजे ने पांच साल तक बेरोकटोक राज किया। उन्होंने कई बार तो केंद्रीय नेतृत्व की भी नहीं सुनी।
सभी गुटों का होगा समावेश
वसुंधरा के सरकार चलाने के तरीकों से कई भाजपा नेता नाराज हो गए थे। उनके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के मद्देनजर शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के पिछले फेरबदल के दौरान उन्हें अपने पसंद के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाकर खुद केंद्रीय मंत्री बनने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन राजे ने एक न सुनी। इसलिए इस बार नेतृत्व ने जमीनी राय के आधार पर टिकट बांटने का फैसला किया है।
जीतने की संभावना ही पैमाना
राज्य के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि इस बार उम्मीदवार के चयन में केवल जीतने की संभावना ही टिकट वितरण का पैमाना होगी। इसलिए पार्टी संभावित उम्मीदवारों को हर तरह से ठोक बजाने और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय पर ही टिकट देगी।