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Parliament: रेलवे संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित, रेल मंत्री बोले- इससे निजीकरण नहीं होगा, विपक्ष फैला रहा झूठ

Wed, 11 Dec 2024 04:35 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Wed, 11 Dec 2024 04:35 PM IST
सार

सदन में रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे (संशोधन) विधेयक 2024 का उद्देश्य रेलवे बोर्ड के कामकाज और स्वतंत्रता को बढ़ाना है। सरकार रेलवे अधिनियम 1989 और भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम के एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है। 

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Railway Amendment Bill passed in LS, Railway Minister said - this will not lead to privatization
अश्विनी वैष्णव - फोटो : PTI

विस्तार

रेलवे संशोधन विधेयक 2024 बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। विधेयक को बहस के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसे लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि संशोधन विधेयक से रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। विपक्ष केवल झूठ फैला रहा है। संविधान को लेकर विपक्ष की फर्जी कहानी पहले ही बेनकाब हो गई है। अब उनका यह झूठ भी विफल हो जाएगा। 

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सदन में रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि कुछ सदस्यों ने कहा है कि विधेयक से रेलवे का निजीकरण होगा। एक फर्जी कहानी बनाने का प्रयास है। मैं पूरी ईमानदारी से अपील करता हूं कि वे ऐसा न करें, संविधान के बारे में उनकी एक फर्जी कहानी पहले ही विफल हो चुकी है। रेलवे (संशोधन) विधेयक 2024 का उद्देश्य रेलवे बोर्ड के कामकाज और स्वतंत्रता को बढ़ाना है। सरकार रेलवे अधिनियम 1989 और भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम के एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है। 

विधेयक पर चर्चा के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 10 हजार लोकोमोटिव और 15 हजार किमी रेलवे ट्रैक पर कवच का काम चालू हो गया है। विकसित देशों ने जो 20 साल में काम किया, वह काम भारत ने पांच साल में किया। कवच लगने से 10 किमी दूर का सिग्नल ड्राइवर को केबिन में मिल जाएगा। बाहर कुहासा हो, तो भी कवच से सिग्नल मिलेगा। ओवर स्पीड होने पर कवच ऑटोमेटिक ब्रेक लगा देगा। आप विश्वास नहीं करेंगे कि ट्रायल के दौरान लोको पायलट के चेहरे पर कितनी खुशी थी। 

रेल मंत्री ने कहा कि ट्रेनों में दो तिहाई कोच नॉन एसी होते हैं। एक तिहाई एसी कोच होते हैं। हमने इस अनुपात को बनाए रखा है। जनरल कोच की मांग भी बढ़ी है। इसलिए 12,000 जनरल कोच विशेष तौर पर बनाए जा रहे हैं। 900 अतिरिक्त जनरल कोच ट्रेनों में लगाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भ्सी कि रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1960 के दशक में प्रति वर्ष 1390 से घटकर पिछले दशक में 80 प्रति वर्ष हो गई। 2021-2022 में अभी भी 34, 2022-23 में 48 और 2023-2024 में 40 परिणामी दुर्घटनाएं हुईं। 

उन्होंने कहा कि जहां रेलवे के लिए 25-30 हजार करोड़ रुपये का बजट होता था, 2014 में उसको बढ़ाकर दो लाख 52 हजार करोड़ रुपये किया गया। हर राज्य को रिकॉर्ड आवंटन किया गया। इसलिए काम में बहुत तेजी आई है। 

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