'राष्ट्र सेवक नहीं, राष्ट्रीय सरेंडर संघ': राहुल गांधी ने RSS को घेरा; राम माधव के बयान पर मचा सियासी बवाल
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए आरएसएस पर तीखा हमला किया और राम माधव के अमेरिका में दिए बयान को लेकर सवाल उठाए। यह टिप्पणी उनकी वाशिंगटन में हुई एक पैनल चर्चा के बाद सामने आई, जिसमें भारत-अमेरिका संबंधों पर बातचीत हुई थी।
विस्तार
देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता राम माधव की अमेरिका में की गई टिप्पणियों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें संगठन की असली फितरत करार दिया है। राहुल गांधी ने आरएसएस को 'राष्ट्रिय सरेंडर संघ' और 'फर्जी' राष्ट्रवाद वाला संगठन बताया है।
राहुल गांधी ने एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट साझा करते हुए लिखा 'राष्ट्रिय सरेंडर संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद। अमेरिका में शुद्ध चाटुकारिता। राम माधव ने केवल संघ की असली फितरत को उजागर किया है।' कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी राम माधव द्वारा वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट के 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में अमेरिकी राजदूत कर्ट कैम्पबेल और एलिजाबेथ थरेलकेल्ड के साथ एक पैनल चर्चा में भाग लेने के एक दिन बाद आई है। इस चर्चा का विषय 'अमेरिका-भारत संबंधों के लिए नए रास्ते' था।
Rashtriya Surrender Sangh.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 25, 2026
Farzi nationalism in Nagpur.
Pure servility in USA.
Ram Madhav has only revealed Sangh’s true nature.
राम माधव के बयान पर विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राम माधव ने अमेरिका में एक पैनल चर्चा के दौरान भारत की ऊर्जा और व्यापार नीति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था 'भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति व्यक्त की। हमने अपने विपक्ष के भारी आलोचना के बावजूद रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति व्यक्त की। भारत ने अधिक कुछ कहे बिना 50% टैरिफ स्वीकार कर लिया। तो अमेरिका के साथ काम करने के लिए भारत वास्तव में क्या पर्याप्त नहीं कर रहा है?' इसी बयान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
बाद में राम माधव ने दी सफाई
अपनी टिप्पणियों पर आलोचना के बाद, राम माधव ने बाद में एक स्पष्टीकरण जारी किया था। उन्होंने कहा कि पैनल चर्चा के दौरान उन्होंने जो कहा वह तथ्यात्मक रूप से गलत था। उन्होंने कहा कि जो मैंने कहा वह गलत था। भारत ने कभी भी रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति नहीं दी थी। साथ ही, इसने 50% टैरिफ लगाए जाने का जोरदार विरोध किया था। मैं दूसरे पैनलिस्ट के सीमित प्रति-बिंदु को रखने की कोशिश कर रहा था। लेकिन यह तथ्यात्मक रूप से गलत था। मेरी क्षमा याचना।
भारत की ऊर्जा नीति की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, भारत साल 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस साल भारत ने अपने कुल तेल आयात का सिर्फ 0.2% रूस से लिया था, लेकिन फरवरी तक यह बढ़कर 20% तक पहुंच गया। भारत का लगभग 40% कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है, जबकि बाकी 60% तेल अन्य देशों से आयात किया जाता है।