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संसद: लोकसभा में कांग्रेस कर रही नए नेता पर विचार, राहुल गांधी रेस में सबसे आगे
Mon, 05 Jul 2021 05:53 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 05 Jul 2021 05:53 AM IST
सार
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों चाहते हैं कि राहुल इस बड़ी भूमिका को स्वीकार करें। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की तरफ जल्दी ही इससे जुड़ी खबर आ सकती है।
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राहुल गांधी
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कांग्रेस पार्टी खुद संगठन में व्याप्त अंतर्कलह से जूझ रही है। पंजाब में जो हो रहा है वो देश के सामने हैं। वहीं अब लोकसभा में कांग्रेस को नया नेता मिलने की उम्मीद है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी इस पद के लिए एक शीर्ष दावेदार हैं।
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संगठन में बड़े बदलावों के बीच, कांग्रेस पार्टी की तरफ से इसके बारे में कुछ भी आधिकारिक नहीं हुआ है क्योंकि राहुल गांधी के ऊपर निर्भर है कि वो क्या चाहते हैं। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों चाहते हैं कि राहुल इस बड़ी भूमिका को स्वीकार करें। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की तरफ जल्दी ही इससे जुड़ी खबर आ सकती है।
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वहीं जब इस बारे में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रनदीप सुरजेवाला ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष के राहुल गांधी को होने से कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक अगर गांधी स्वीकार करते हैं, तो कांग्रेस अध्यक्ष का पद परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को मिल सकता है, कुछ ऐसा जो 23 कांग्रेस नेताओं के समूह की मांगों को भी पूरा करेगा, जो आंतरिक चुनाव की मांग कर रहे हैं। हालाँकि, कांग्रेस अध्यक्ष पर निर्णय बाद के चरण में लिया जा सकता है क्योंकि वर्तमान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का कार्यकाल 2022 तक है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि लोकसभा का नेता होना और उसका काम से निकल पाना इतना आसान नहीं है। यह राहुल को संसद से बांध देगा और कुछ मायनों में यह कांग्रेस अध्यक्ष होने की तुलना में बहुत कठिन काम है। गांधी पर अक्सर भारतीय जनता पार्टी द्वारा उनकी संसद में कम उपस्थिति और संसदीय समिति की सुनवाई में नियमित नहीं होने के लिए हमला किया गया है।
अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए दोषी ठहराया गया था, जहां 135 साल पुरानी पार्टी विधानसभा में एक भी सीट पाने में विफल रही थी।
इसके अलावा, चौधरी के सहयोगियों ने भी उन्हें लोकसभा में पार्टी के मामलों के प्रबंधन में खराब समीक्षा दी और कुछ ने यह भी महसूस किया कि वह सत्ताधारी पार्टी के विरोधी नहीं थे। इसके बाद कांग्रेस में मंथन भी हुआ था।