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राहुल गांधी किसान यात्रा: क्या बात, अब तो खाट के भी ठाट
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
Updated Thu, 06 Oct 2016 01:06 AM IST
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खाट
- फोटो : ANI
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कांग्रेस की खाट सभाओं के चलते खाट के भी ठाठ आ गए है। मार्केट में नए-नए डिजाइन की खाट पहुंच गईं हैं। खाट भी ऐसी कि अगर बंगले के बेडरूम में पहुंच जाए तो शान बढ़ा दे। गांव की चौपालों पर तो चारपाई पर बैठकर खूब सियासी चर्चे हो रहे हैं। कई जगह तो खाट का नाम भी कांग्रेस वाली खाट कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार के गांवों में खाट का चलन सबसे ज्यादा रहा। अगर किसी की चौपाल पर आठ दस खाट पड़ी हैं तो माना जाता था कि वह उस गांव का बड़ा आदमी है। लेकिन धीरे धीरे खाट घरों से दूर होने लगी। फोल्डिंग पलंग आ गए। चौपालों पर मूढ़ा और कुर्सियां बिछ गईं। लेकिन इस साल जैसे ही कांग्रेस ने खाट की ब्रांडिंग शुरू की। राहुल गांधी खाट सभा करने लगे।
सियासी मंच पर खाट पहुंच गई तो मार्केट भी उसी तरह से तैयार हो गया। डिजाइनदार खाट बन रही हैं। सादा बान वाली खाट, प्लास्टिक के बान वाली चारपाई, निबाड़ वाली खाट, कपड़े वाली खाट, प्लास्टिक की चादर वाली खाट तैयार हो रही हैं। मथुरा में खाट की 35 दुकानें हैं। दुकानदार वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि खाट की बिक्री तो पिछले वर्षों में बहुत कम हो गई है। शहरों से तो खरीदारी होती ही नहीं है। गांव में जरूर खाट जा रही है। लेकिन पहले सादा खाट ही बनती थी और अब कई डिजाइन आ गए हैं।
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उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार के गांवों में खाट का चलन सबसे ज्यादा रहा। अगर किसी की चौपाल पर आठ दस खाट पड़ी हैं तो माना जाता था कि वह उस गांव का बड़ा आदमी है। लेकिन धीरे धीरे खाट घरों से दूर होने लगी। फोल्डिंग पलंग आ गए। चौपालों पर मूढ़ा और कुर्सियां बिछ गईं। लेकिन इस साल जैसे ही कांग्रेस ने खाट की ब्रांडिंग शुरू की। राहुल गांधी खाट सभा करने लगे।
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सियासी मंच पर खाट पहुंच गई तो मार्केट भी उसी तरह से तैयार हो गया। डिजाइनदार खाट बन रही हैं। सादा बान वाली खाट, प्लास्टिक के बान वाली चारपाई, निबाड़ वाली खाट, कपड़े वाली खाट, प्लास्टिक की चादर वाली खाट तैयार हो रही हैं। मथुरा में खाट की 35 दुकानें हैं। दुकानदार वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि खाट की बिक्री तो पिछले वर्षों में बहुत कम हो गई है। शहरों से तो खरीदारी होती ही नहीं है। गांव में जरूर खाट जा रही है। लेकिन पहले सादा खाट ही बनती थी और अब कई डिजाइन आ गए हैं।
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पांच सौ रुपये से लेकर 800 रुपये तक में बिक रही है खाट
अबरार का कहना है कि पांच सौ रुपये से लेकर 800 रुपये तक की खाट है। बान वाली खाट क्योंकि चुभती थी लिहाजा अब कपड़े की चादर वाली खाट आ गई है। डीग गेट निवासी सुभाष का कहना है कि अब लोहे के पाइप वाली खाट भी आ गई है। यह खाट बहुत मजबूत होती है। होटल और ढाबों से इस प्रकार की खाट की मांग सबसे ज्यादा है।
अलीपुर निवासी मदन मेजर का कहना है कि उनकी चौपाल में हमेशा खाट रही है। वैसे भी चौपाल खाट से ही सजती है। एक खाट पर तीन लोग आराम से बैठ सकते हैं। वहीं गांव में जिसका भी थोड़ा सा सियासी ताल्लुकात है और लोगों का आना जाना लगा रहता है वहां तो खाट बहुत जरूरी है। वैसे भी चुनाव को लेकर गतिविधियां चल रही हैं तो प्रत्याशी और पार्टियों के लोग असरदार व्यक्तियों के घरों पर पहुंचते हैं।
सादे बान वाली खाट-500 रुपये
निबाड़ वाली खाट-600 रुपये
प्लास्टिक वाली खाट-700 रुपये
कपड़े वाली खाट-600
लोहे के पाइप वाली खाट-800
अलीपुर निवासी मदन मेजर का कहना है कि उनकी चौपाल में हमेशा खाट रही है। वैसे भी चौपाल खाट से ही सजती है। एक खाट पर तीन लोग आराम से बैठ सकते हैं। वहीं गांव में जिसका भी थोड़ा सा सियासी ताल्लुकात है और लोगों का आना जाना लगा रहता है वहां तो खाट बहुत जरूरी है। वैसे भी चुनाव को लेकर गतिविधियां चल रही हैं तो प्रत्याशी और पार्टियों के लोग असरदार व्यक्तियों के घरों पर पहुंचते हैं।
सादे बान वाली खाट-500 रुपये
निबाड़ वाली खाट-600 रुपये
प्लास्टिक वाली खाट-700 रुपये
कपड़े वाली खाट-600
लोहे के पाइप वाली खाट-800