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'ये नाकामी के सबूत हैं': PM मोदी की अपील पर राहुल गांधी ने साधा निशाना, बोले- देश चलाना उनके बस की बात नहीं
Mon, 11 May 2026 10:30 AM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 11 May 2026 10:30 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई अपील पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह नाकामी का सबूत है। उन्होंने कहा कि 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है कि वह क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए। पढ़िए रिपोर्ट-
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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री की ओ से की गई सात अपील पर निशाना साधा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझौता करने वाला बताया। उन्होंने लिखा, मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं- ये नाकामी के सबूत हैं।
उन्होंने आगे लिखा, 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, ताकि खुद की जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब समझौता करने वाले प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं।
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प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर परिवार को खाने के तेल का इस्तेमाल कम करना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और पर्यावरण की रक्षा हो सके। प्रधानमंत्री सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कह कि खाने के तेल की खपत कम करने से लोगों की सेहत भी बेहतर होगी और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा, खाने के तेल के आयात पर देश को विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर हर परिवार खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो यह देशभक्ति में बड़ा योगदान होगा। इससे देश के खजाने की सेहत भी सुधरेगी और परिवार के हर सदस्य की सेहत भी बेहतर होगी।
उन्होंने रासायनिक खाद के आयात पर पड़ने वाले दबाव का भी जिक्र किया। प्रधानमत्री ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में विदेश से रासायनिक खाद खरीदता है। उन्होंने किसानों से इसके उपयोग को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा, कृषि क्षेत्र में भी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। हम विदेश से रासायनिक खाद आयात करते हैं। हमें इसका उपयोग आधा करना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और हमारी जमीन व धरती माता भी सुरक्षित रहेंगी।
ये भी पढ़ें: '1998 के पोखरण परीक्षण ने भारत की वैज्ञानिक ताकत को दिखाया', पीएम मोदी का ट्वीट
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देशभक्ति की नई परिभाषा भी दी और कहा कि हर भारतीय को आर्थिक मजबूती के लिए सामूहिक प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देने तक सीमित नहीं है। आज के समय में देशभक्ति का मतलब है जिम्मेदारी से जीवन जीना और रोजमर्रा की जिंदगी में देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हों, वहां उनका इस्तेमाल करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कार पूलिंग करनी चाहिए, सामान की ढुलाई के लिए रेलवे का अधिक उपयोग करना चाहिए और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझौता करने वाला बताया। उन्होंने लिखा, मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं- ये नाकामी के सबूत हैं।
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उन्होंने आगे लिखा, 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, ताकि खुद की जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब समझौता करने वाले प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं।
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प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर परिवार को खाने के तेल का इस्तेमाल कम करना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और पर्यावरण की रक्षा हो सके। प्रधानमंत्री सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कह कि खाने के तेल की खपत कम करने से लोगों की सेहत भी बेहतर होगी और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा, खाने के तेल के आयात पर देश को विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर हर परिवार खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो यह देशभक्ति में बड़ा योगदान होगा। इससे देश के खजाने की सेहत भी सुधरेगी और परिवार के हर सदस्य की सेहत भी बेहतर होगी।
उन्होंने रासायनिक खाद के आयात पर पड़ने वाले दबाव का भी जिक्र किया। प्रधानमत्री ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में विदेश से रासायनिक खाद खरीदता है। उन्होंने किसानों से इसके उपयोग को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा, कृषि क्षेत्र में भी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। हम विदेश से रासायनिक खाद आयात करते हैं। हमें इसका उपयोग आधा करना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और हमारी जमीन व धरती माता भी सुरक्षित रहेंगी।
ये भी पढ़ें: '1998 के पोखरण परीक्षण ने भारत की वैज्ञानिक ताकत को दिखाया', पीएम मोदी का ट्वीट
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देशभक्ति की नई परिभाषा भी दी और कहा कि हर भारतीय को आर्थिक मजबूती के लिए सामूहिक प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देने तक सीमित नहीं है। आज के समय में देशभक्ति का मतलब है जिम्मेदारी से जीवन जीना और रोजमर्रा की जिंदगी में देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हों, वहां उनका इस्तेमाल करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कार पूलिंग करनी चाहिए, सामान की ढुलाई के लिए रेलवे का अधिक उपयोग करना चाहिए और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए।
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