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समंदर में नहीं चलेगी मनमानी: होर्मुज को खुला रखने के लिए क्वाड देश एकजुट, जानें क्या हुआ फैसला
Tue, 26 May 2026 01:09 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 26 May 2026 01:09 PM IST
सार
क्वाड देशों ने एकजुट होकर फैसला किया है कि तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य समेत किसी भी समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों को नहीं रोका जाएगा। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वैश्विक तेल संकट और महंगाई को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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होर्मुज का रास्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत और अमेरिका सहित क्वाड देशों ने वैश्विक व्यापार को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। क्वाड ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही किसी भी कीमत पर नहीं रुकने दी जाएगी। अगर किसी ने भी इन जहाजों को रोकने की कोशिश की, तो चारों देश मिलकर उसका कड़ा विरोध करेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और जहाजों का बेरोकटोक परिवहन
क्वाड देशों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की बात कही है। इसके लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाया जाएगा। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
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क्षेत्रीय पहल और कमजोर देशों की मदद
क्वाड की बैठक में विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जाएंगी। चारों देशों ने क्षेत्रीय पहलों की सराहना की है।
जापान की पहल: एशिया की ऊर्जा स्थिरता के लिए 'पावर एशिया' कार्यक्रम।
भारत का प्रयास: दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों को ऊर्जा सुरक्षा में समर्थन।
ऑस्ट्रेलिया का योगदान: दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दो अरब डॉलर का निवेश कोष। इसके साथ ही आसियान पावर ग्रिड को समर्थन और फिजी को तीन करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वित्तीय सहायता।
क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम का गठन
भविष्य की चुनौतियों के लिए एक नई कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत तकनीक, प्रबंधन, नीति और बाजार विश्लेषण पर मिलकर काम होगा। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त अभ्यास भी किए जाएंगे। इसका एक मुख्य उद्देश्य सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रहेगा। इस पूरे तालमेल को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही 'क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' बनाया जाएगा। यह फोरम उच्च स्तरीय चर्चा और सहयोग को आगे बढ़ाएगा।
क्वाड देशों का यह साझा बयान होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है। सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करने और 'फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' के गठन से वैश्विक बाजार की अस्थिरता को रोकने और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार
पश्चिम एशिया में यह भारी तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। तब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। इस हमले में ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे इलाके में जंग छिड़ गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसी दिन, यानी 28 फरवरी 2026 से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया। तब से अब तक करीब तीन महीनों से यह रास्ता बंद पड़ा है।
इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है। समुद्री जहाजों का किराया और बीमा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, बीच में युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है। इसी वजह से क्वाड देशों को व्यापारिक जहाजों को बचाने के लिए आगे आना पड़ा है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और जहाजों का बेरोकटोक परिवहन
क्वाड देशों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की बात कही है। इसके लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाया जाएगा। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
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क्षेत्रीय पहल और कमजोर देशों की मदद
क्वाड की बैठक में विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जाएंगी। चारों देशों ने क्षेत्रीय पहलों की सराहना की है।
जापान की पहल: एशिया की ऊर्जा स्थिरता के लिए 'पावर एशिया' कार्यक्रम।
भारत का प्रयास: दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों को ऊर्जा सुरक्षा में समर्थन।
ऑस्ट्रेलिया का योगदान: दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दो अरब डॉलर का निवेश कोष। इसके साथ ही आसियान पावर ग्रिड को समर्थन और फिजी को तीन करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वित्तीय सहायता।
क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम का गठन
भविष्य की चुनौतियों के लिए एक नई कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत तकनीक, प्रबंधन, नीति और बाजार विश्लेषण पर मिलकर काम होगा। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त अभ्यास भी किए जाएंगे। इसका एक मुख्य उद्देश्य सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रहेगा। इस पूरे तालमेल को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही 'क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' बनाया जाएगा। यह फोरम उच्च स्तरीय चर्चा और सहयोग को आगे बढ़ाएगा।
क्वाड देशों का यह साझा बयान होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है। सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करने और 'फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' के गठन से वैश्विक बाजार की अस्थिरता को रोकने और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार
पश्चिम एशिया में यह भारी तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। तब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। इस हमले में ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे इलाके में जंग छिड़ गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसी दिन, यानी 28 फरवरी 2026 से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया। तब से अब तक करीब तीन महीनों से यह रास्ता बंद पड़ा है।
इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है। समुद्री जहाजों का किराया और बीमा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, बीच में युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है। इसी वजह से क्वाड देशों को व्यापारिक जहाजों को बचाने के लिए आगे आना पड़ा है।