साइको किलर: जो भी रास्ते में आता, उस पर गोली जरूर चलाता था
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सबसे करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा संग छात्र गुटों के मामूली झगड़ों से जरायम सफर शुरू करने वाला मुनीर अब साइको किलर बन गया। मंगलवार तड़के गिरफ्तारी के बाद जिस अंदाज में उसने टीम के सवालों का जवाब दिया तो उसके हाव-भाव देख सभी दंग रह गए। उसने स्वीकारा कि वह आने वाले समय में अत्याधुनिक हथियार एके-47 खरीदने जा रहा था। ताकि पश्चिमी यूपी व एनसीआर में अपनी किलिंग मशीन ए कंपनी का डंका बज सके।
इसी मकसद से उसने बिजनौर में 90 लाख रुपया लूटा। इस बात की भनक तंजील को लग गई और वह उसकी राह का रोड़ा बनता दिख रहा था। इसलिए तंजील को ही मार दिया। वह दक्षिण भारतीय फिल्म गोलमार के मुख्य किरदार के अंदाज में बताता है कि जो भी उसके रास्ते में आता, उसे गोली जरूर मारता। अब वह बचे या मरे। हर समय पीठ पर बैग, जिसमें हथियारों के साथ-साथ करतूसों का जखीरा रहता था।
कई हस्तियों के निशाने पर होने की चर्चा
पुलिस सूत्रों के अनुसार उसका जरायम फील्ड अलीगढ़ अधिक रहा। यहां उसे कई ग्रुपों का संरक्षण भी मिला। इसलिए उसके संपर्क में अलीगढ़ के कई लोग थे। उन्हीं में से कुछ उससे काम कराना चाह रहे थे। सूत्रों की मानें तो उसको अलीगढ़ के तीन-चार प्रमुख लोगों की सुपारी भी ऑफर थी। हालांकि अभी इस दिशा में उसने तैयारी नहीं की थी। हां, अगर तंजील की हत्या न होती और पुलिस उसके पीछे न होती तो शायद अब तक वह एके-47 खरीद चुका होता और वह अलीगढ़ में उन घटनाओं को अंजाम दे जाता।
तंजील की हत्या के बाद दो दिन को आया अलीगढ़
मुनीर ने स्वीकारा है कि वह तंजील अहमद की हत्या के बाद गुजरात, नेपाल, दिल्ली, लखनऊ आदि शहरों में गया और अलीगढ़ भी आया। इस दौरान वह एएमयू में हॉस्टल के अपने पुराने साथियों के बीच रुका और चला गया।
मुनीर ने पूछताछ में स्वीकारा है कि वह बेहद महत्वाकांक्षी हो गया था। उसने जब बिजनौर में अपराध शुरू किया तो उसी के गांव से ताल्लुक रखने वाले एनआईए अफसर तंजील अहमद उसके आड़े आने लगे। उसके विषय में जानकारियां जुटाने लगे और यहां तक कि उसके दो साथियों को भी पकड़ा गया। बाद में वह छूटे। उसे तंजील से खतरा लगा। इसलिए उन्हें मार दिया।
-अमित पाठक एसएसपी एसटीएफ