विधानसभा चुनावों पर प्रियंका की पैनी नजर, कांग्रेस उपाध्यक्ष मानते हैं हर बात
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी दोनों को संवारने के लिए प्रियंका गांधी काफी कड़ी मेहनत कर रही हैं। प्रियंका इस समय न केवल पार्टी की हर महत्वपूर्ण चुनावी बैठक में शरीक हो रही हैं, बल्कि उ.प्र., पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों के चयन, मुद्दों के निर्धारण तथा प्रचार अभियान को लेकर काफी सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा प्रियंका हर रोज मां सोनिया गांधी के साथ एक बार भोजन करना, उनके साथ कुछ पल बिताना भी नहीं भूल रही हैं।
राहुल गांधी का कार्यालय भी प्रियंका के निर्देश की बाट जोहता रहता है। वह जैसा चाहती हैं, कांग्रेस उपाध्यक्ष देर-सबेर ही सही उसे मान लेते हैं। सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी को 15 जनवरी को चीन दौरे पर जाना था। राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम के लिए अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी थी।
उनके साथ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को भी जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर प्रियंका की सलाह को मानते हुए राहुल गांधी ने जाने की योजना रद्द कर दी। उन्होंने चीन को कार्यक्रम में व्यस्त होने का हवाला देकर देश में रहना उचित समझा।
जब पहुंच गई प्रियंका
ताल कटोरा स्टेडिम में जन वेदना सम्मेलन होना था। यह नोटबंदी के बाद जनता को हुई परेशानियों पर आयोजित कार्यक्रम था। कांग्रेस मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि तैयारियों का जायजा लेने के लिए अहमद पटेल तालकटोरा स्टेडियम पहुंचे।
जैसा कि पटेल की आदत है वह देर रात ही आयोजन स्थल पर जाते हैं। जायजा लेने के बाद करीब पौने एक बजे रात में अहमद पटेल तालकटोरा स्टेडियम से लौटने ही वाले थे कि सामने की गाड़ी देखकर चौंक गए। उस गाड़ी में प्रियंका थी।
ताल कटोरा स्टेडियम में तैयारी का जायजा लेने आई थी। करीब दो बजे रात तक वहां रुककर प्रियंका ने न केवल तैयारियों का जायजा लिया, बल्कि कार्यक्रम की रूपरेखा की समीक्षा भी की।
उ.प्र. की राजनीति में भी भूमिका
मां और भाई के बीच संदेश वाहक
प्रियंका मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के बीच संदेश वाहक का भी काम कर रही हैं। जब से सोनिया गांधी का स्वास्थ्य खराब चल रहा है, प्रियंका उनकी हर रोज देखभाल करती हैं। प्रियंका पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी लेती रहती हैं। वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में रहती हैं।
राहुल राजनीतिक गतिविधियों में काफी व्यस्त चल रहे हैं। इसलिए राहुल से भी सलाह मशविरा करती हैं और सोनिया को उससे अवगत कराती हैं। सोनिया से मिले दिशा-निर्देश को वह कांग्रेस उपाध्यक्ष तक पहुंचाती हैं। इतना ही नहीं राहुल के राजनीतिक मूव को भी सोनिया गांधी तक पहुंचाती हैं।
उ.प्र. की राजनीति में भी भूमिका
उ.प्र. के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद हों या राज बब्बर, संजय सिंह या फिर प्रशांत किशोर, प्रियंका सभी के संपर्क में हैं। वह उ.प्र. से जुड़ी हर राजनीतिक गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रही हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, पंजाब में भी कांग्रेस के चुनाव अभियान में भी उनकी भूमिका है।
चुनाव प्रचार के रणनीतिकारों में एक प्रशांत किशोर की सलाह को भी वह गंभीरता से लेती हैं। इतना ही नहीं नवजोत सिंह सिद्धू की कांग्रेस में वापसी हो या उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के साथ संवाद, प्रियंका ने कई पहल की है। समझा जा रहा है कि वह आगे आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति का भी हिस्सा बनेंगी।