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आखिर 18 साल में पहली बार अमेठी में प्रचार से क्यों दूर हैं प्रियंका गांधी?

Tue, 21 Feb 2017 06:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Feb 2017 06:10 PM IST
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Priyanka gandhi why not campaign in Amethi and Raebareli

ये 1999 लोकसभा चुनावों की बात है। कांग्रेस पचमढ़ी के अधिवेशन में 'एकला चलो रे' का नारा देकर निकली थी। सोनिया गांधी कांग्रेस की अगुवाई कर रही थीं और खुद अमेठी सीट से चुनाव लड़ रही थीं। इंदिरा गांधी की विरासत वाली रायबरेली सीट से गांधी परिवार के करीबी कैप्टन सतीश शर्मा चुनाव लड़ रहे थे। इस चुनाव के पहले 96 और 98 के दोनों चुनावों में कांग्रेस इस सीट से अपनी जमानत गंवा चुकी थी। कैप्टन सतीश शर्मा एक ऐसी सीट से चुनाव लड़ने के ‌लिए आए थे जो कहने को तो कांग्रेस का गढ़ थी लेकिन वहां का ग्रास रूट लेवल का कार्यकर्ता पूरी तरह से गायब हो चुका  था। 

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इस चुनाव में कैप्टन के मुकाबले बीजेपी के अरुण नेहरू थे। वही अरुण नेहरू जो कभी राजीव गांधी के खास हुआ करते थे। चुनाव बीजेपी के पक्ष में था। अटल बिहारी वाजपेयी की लहर वाली बीजेपी आक्रामक थी। इन्हीं किसी दिन में राजीव गांधी की बेटी की जनसभा रायबरेली के जीआईसी मैदान में हुई। तब तक प्रियंका की अपनी कोई पहचान नहीं थी। यह उनकी पहली रैली थी और उन्होंने बिना लिखा भाषण पढ़ा था। इस भाषण की लोकप्रियता इस बात से समझ सकते हैं कि इसकी ऑडियो रिकार्डिंग तब सीडी के जरिए दुकानों में बिकनी शुरू हो गई थी। यह वाट्सअप का युग नहीं था और न ही फेसबुक पर ट्रोल कराने का।
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प्रियंका ने उस भाषण में एक नहीं कई बार यह बात कही कि आपने अपने राजीव की पीठ पर छूरा घोपने वाले को उनके घर में घुसने कैसे दिया। प्रियंका के इस भावुक भाषण ने पूरा समीकरण ही बदल दिया। पिछले चुनाव में जमानत गंवाने वाली कांग्रेस यहां अच्छे अंतर से जीती। 
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उस चुनाव के बाद से प्रियंका रायबरेली के लिए खासमखास बन गईं। 2004 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट सोनिया की हो गई और अमेठी राहुल ने संभाल ली। 1999 के बाद से ऐसा कोई चुनाव नहीं रहा जिसमें प्रियंका न पहुंची हों। प्रियंका का चुनाव प्रचार करने का स्टाईल हारे हुए प्रत्याशी को जीत नसीब करा देता। सोनिया यदि बड़े अंतर से जीतती रहीं तो इसके पीछे की बड़ी वजह प्रियंका गांधी रही हैं। 

अब 18 साल के बाद पहला ऐसा मौका आ रहा है जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में प्रियंका रायबरेली और अमेठी में नहीं होंगी। 

प्रियंका भी इस बात को अच्छी तरह समझती हैं इसलिए हर चुनावों में वह मां और भाई के कंधा से कंधा मिलाकर पार्टी के लिए प्रचार करती नजर आती हैं। लोकसभा चुनावों में तो वो रायबरेली और अमेठी में मां और भाई के चुनावों का प्रबंधन खुद ही संभालती हैं, दोनों ही जिलों में कार्यकर्ताओं के बीच उनकी जबरदस्त लोकप्रियता तो है ही प्रियंका का भी यहां से खास लगाव है।

लेकिन 18 सालों में पहली बार देखने को आ रहा है कि विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनावों के बाद भी प्रियंका ने एक बार भी इधर का रुख नहीं किया है। अमेठी रायबरेली को लेकर प्रियंका की बेरुखी कई सवाल खड़े कर रही है। 

पार्टी से लगातार प्रियंका को भेजने की डिमांड कर रहे उम्‍मीदवार

Priyanka gandhi why not campaign in Amethi and Raebareli
priyanka gandhi

यूपी के विधानसभा चुनावों में सपा और कांग्रेस का गठबंधन कराने में प्रियंका गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है लेकिन गठबंधन की गांठ जुड़ने के बाद से ही वह पर्दे से गायब हैं। न किसी चुनावी सभा में प्रियंका दिखाई पड़ीं न किसी बैठक में ही उनकी कोई भूमिका रही। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पार्टी खुद प्रियंका से प्रचार कराने में पीछे हट रही है या प्रियंका ने ही खुद को चुनावों से अलग कर रखा है।

यह स्थिति तब है जब अमेठी और रायबरेली के कांग्रेस उम्‍मीदवारों ने खुद कई बार प्रियंका की सभा कराने के लिए पार्टी से डिमांड कर रखी है। कुछ उम्‍मीदवारों ने तो चुनावी सभा न होने की स्थि‌ति में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक ही कराने की मांग कर डाली है।

उम्‍मीदवारों की डिमांड है कि प्रियंका कम से कम एक दौरा तो उनके चुनावी क्षेत्र का जरूर करें। प्रियंका की इस बेरुखी और पार्टी की चुप्पी ने उम्‍मीदवारों की बेचैनी बढ़ा दी है। 

लोकसभा चुनावों के ट्रंप कार्ड पर प्रियंका को बचाकर रखना चाहती है कांग्रेस

Priyanka gandhi why not campaign in Amethi and Raebareli

हालांकि रायबरेली और अमेठी में चुनाव तीसरे और चौथे चरण में होना है जिसको लेकर कुछ दिन का समय बाकी है, लेकिन अभी तक पार्टी की ओर से प्रियंका गांधी का कोई कार्यक्रम वहां तय नहीं किया गया है इसको लेकर उम्‍मीदवार में लगातार बेचैनी है। हालांकि यहां सोनिया और राहुल गांधी को प्रचार करने के लिए आना है लेकिन उम्‍मीदवारों के बीच दोनों से ज्यादा डिमांड प्रियंका गांधी की ही है।

वैसे यहां प्रियंका के न आने का कारण पिछला विधानसभा चुनाव भी माना जा रहा है। जब प्रियंका के सभी सीटों पर जमकर प्रचार करने के बावजूद भी पार्टी को यहां मात्र दो सीटें ही मिल पाई थीं। ऐसे में पार्टी प्रबंधन नहीं चाहता कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले किसी भी तरह प्रियंका की चमक कम हो।

पार्टी उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में ट्रंप कार्ड के तौर पर इस्तेमाल करने की रणनीति पर चल रही है। उसकी बड़ी वजह ये भी है कि कांग्रेस में प्रियंका जैसा भीड़ खींचने वाला लोकप्रिय चेहरा कोई दूसरा नहीं है। जिसे वह 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने उतार सके।

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