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चुनौती और जिम्मेदारी समझकर बढ़ रहे हैं पीएम मोदी, मंत्रियों ने भी संभाला कामकाज

Sat, 01 Jun 2019 08:25 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Sat, 01 Jun 2019 08:25 PM IST
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Prime Minister Narendra Modi understanding the challenges and responsibilities
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

शपथ लेने और विभाग बंटवारे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमडलीय सहयोगियों ने कार्यभार संभालना शुरू कर दिया है। कुछ मंत्रियों ने शुक्रवार और कुछ ने शनिवार और अधिकतर ने अगले सप्ताह कामकाज संभाल लेंगे। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कामकाज संभालने के साथ ही बजट 2019-20 को लेकर शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की है। भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री ने कामकाज संभाला और शीर्ष अधिकारियों से जम्मू-कश्मीर और आंतरिक सुरक्षा पर जानकारी लेना शुरू कर दिया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कामकाज संभाला। इससे पहले वह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक गए, तीनों सेनाध्यक्षों से मिले और मंत्रणा में व्यस्त हैं।

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नितिन गडकरी शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में हिस्सा लेने के बाद नागपुर चले गए हैं। वह सोमवार को कामकाज संभालेंगे। रोजगार एवं श्रम कल्याण मंत्री संतोष गंगवार ने शुक्रवार को न केवल कामकाज संभाला बल्कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 3000 रुपये हर महीने मासिक पेंशन देने का तोहफा भी दे दिया। कैबिनेट ने इस पर मुहर भी लगा दी है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतरर्गत देश के सभी किसानों को सालाना छह हजार रुपये देने की घोषणा की है। उनकी घोषणा से 15 करोड़ किसानों को फायदा होने की संभावना है।
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प्रधानमंत्री समझ रहे हैं चुनौती

प्रधानमंत्री ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में विभाग का बंटवारा किया है और पहली कैबिनेट की मीटिंग में जो निर्णय लिए गए हैं, प्रधानमंत्री मोदी के नया इंडिया बनाने के रोड-मैप की ही चुगली कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की पहली चुनौती अर्थव्यवस्था में स्थायित्व के साथ उछाल लाकर नोटबंदी से हुए नुकसान से देश को बाहर निकालना है। इसका सबसे बड़े दुष्प्रभाव रोजगार और आद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है। प्रधानमंत्री देश के गांव, किसान और मजदूर की जेब में पैसा डालकर अर्थ तंत्र को मजबूत आधार देने का रोड मैप बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देश के किसानों से 2022 तक उनकी लागत कम करके आय दो गुनी करने का वादा किया है। ताकि किसानों को बदहाली से बाहर निकाला जा सके। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में हुए निर्णय को इसी दिशा में एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
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बजट की बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में पूरक बजट पेश किया था। अब केंद्र में सरकार बनने के बाद पूर्ण बजट पेश करना है। 2014 से 2019 के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे पर अंकुश पाने में संवेदनशीलता दिखाई थी। साल 2019-20 के बजट में पहले घोषित घोषणाओं की अनुपालना, आर्थिक रफ्तार तथा राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने की चुनौती बनाए रखना बहुत आसान नहीं है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के रास्ते पर चलकर वर्तमान वित्तमंत्री को प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। देश में रोजगार के अवसर सृजित करने के माध्यमों पर विशेष ध्यान देना होगा। बैंकिंग अर्थ व्यवस्था को ध्यान में रखकर ठोस कदम उठाने होंगे। वित्त मंत्रालय के एक आईआरएस कॉडर के अधिकारी की माने तो कड़वी गोली देनी पड़ सकती है।

सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा

भाजपा ने 2019 का आम चुनाव राष्ट्रवाद की बुलंदी पर जीता है। इसके सामानांतर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर के अंदरुनी हालात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के बाद झारखंड में भी सिर उठा रहा नक्सलवाद, पूर्वोत्तर का उग्रवाद पहले से बड़ी चुनौती है। इसके साथ-साथ केन्द्र सरकार को धारा 370,ए और अनुच्छेद 35 ए की से भी पार पाना है। राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण पर स्टैंड लेना है। देश के भीतर पुलिस आधुनिकीकरण, अर्ध सैनिक बल के आधुनिकीकरण तथा सेना को पाकिस्तान, चीन से मिल रही दोहरी चुनौती के लिए धारदार बनाना है। प्रधानमंत्री ने इससे निबटने के लिए सहयोगी के तौर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और साफ-सुथरी छवि के कद्दावर राजनाथ सिंह को चुना है। अमित शाह ने पदभार संभालने की देश की आंतरिक सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त करने की अपनी प्राथमिकता बता दी है।

विदेश नीति

अमेरिका प्रोटेक्शनिज्म की तरफ है। चीन से अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वॉर शुरू हो चुका है। यूरोप विश्व स्तर पर आ रहे बदलाव को लेकर चौकन्ना है और जापान, दक्षिण कोरिया, इस्राइल जैसे देश नए समीकरण पर निगाह लगाए बैठे हैं। भारत का खाड़ी देशों से रिश्ता है और ईरान के साथ तेल के आयात, चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक जाने का वैकल्पिक रास्ता बनाने की मधुरता है। रूस, इस्राइल, अमेरिका, और फ्रांस बड़े रक्षा हार्डवेयर निर्यातक देश हैं। इनके बीच में संतुलित समीकरण बनाना है। यह प्रधानमंत्री मोदी-2 सरकार के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है। माना जा रहा है कि इसी चुनौती को केन्द्र में रखकर प्रधानमंत्री ने किसी राजनीतिक व्यक्ति की बजाय आईएफएस अधिकारी और पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी है। जयशंकर को सीधे केन्द्रीय मंत्री बनाना प्रधानमंत्री की चुनौती की समझ की तरफ ईशारा कर रहा है। एस जयशंकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विजय गोखले और प्रधानमंत्री के तालमेल बनाकर चलने वाले नौकरशाह रहे हैं। विनम्रता के साथ कूटनीति की गहरी समझ रखते हैं और शांति तथा संयम के साथ सलीके से बड़ी पहल करने में माहिर हैं। प्रधानमंत्री अपनी इस चौकड़ी के जरिए विदेश नीति को नई धार देना चाह रहे हैं।


राजनीतिक चुनौती

प्रधानमंत्री के चेहरे और अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा में 303 सांसदों के आंकड़े को छुआ है। यह बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है। सफलता हमेशा अपने साथ लोगों की उम्मीद बांधकर लाती है। नई सरकार को इसे भी साबित करना है। इस साल के अंत तक जम्मू-कस्मीर, असम और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। अगले साल दिल्ली और बिहार विधानसभा के चुनाव की चुनौती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 में दिल्ली में मिली करारी हार और बिहार विधान सभा के चुनाव में असफलता ने भाजपा और मोदी सरकार का जायका  बिगाड़ दिया था। प्रधानमंत्री की निगाह में यह चुनौती भी जरूर होगी। इसमें भी जम्मू-कश्मीर में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का गठन तो किसी सपने से कम नहीं है।

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