नमन: भगत सिंह की 114वीं जयंती आज, पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह समेत इन नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिदूत अमर शहीद भगत सिंह की आज 114वीं जयंती है। भगत सिंह का जन्म 1907 में लायलपुर ( अब पाकिस्तान में है) स्थित बंगा गांव में हुआ था। बेहद कम उम्र से ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने और साम्राज्य को निशाना बनाने के लिए उन्हें सिर्फ 23 साल की उम्र में फांसी दे दी गई थी। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उल्लेखनीय नायकों में से एक थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगत सिंह की जयंती पर ट्वीट किया, "आजादी के महान सेनानी शहीद भगत सिंह को उनकी जन्म-जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि"। बीते दिनों पीएम मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’के दौरान शहीद वीर भगत सिंह की जयंती पर उन्हें श्रृद्धांजलि दी थी। पीएम मोदी ने शहीद भगत सिंह को बहादुरी और साहस का प्रतीक बताया
वहीं, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, "भगत सिंह जी को अपने प्राणों से ज्यादा देश की स्वतंत्रता और सम्मान प्यारा था। वो अल्पायु में ही अपने साहस व क्रांतिकारी विचारों से न सिर्फ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सर्वोच्च प्रतीक बने बल्कि उनके राष्ट्रप्रेम ने पूरे देश को एक किया।"
वहीं, दिल्ली के शिक्षामंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने भगत सिंह की जयंती पर उन्हें नमन किया। मनीष सिसोदिया ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया।
हम मरेंगे भी तो दुनिया में जिंदगी के लिए।
— Manish Sisodia (@msisodia) September 28, 2021
सबको जीना सीखा जायेंगे मरते मरते...
ये ना समझो भगत फाँसी पर लटकाया गया,
सैंकड़ों भगत बन जायेंगे मरते मरते...
शहीद ए आज़म भगत सिंह की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
इंकलाब जिंदाबाद! pic.twitter.com/sJDDjmISoY
जलियावाला बाग में नरसंहार ने भगत सिंह का बदला मन
भगत सिह को देश भक्ति विरासत मे मिली थी, क्योंकि उनके दादा अर्जुन सिंह, उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह गदर पार्टी के अभिन्न हिस्से थे। जब 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला बाग में नरसंहार हुआ, तो इसे देखकर भगत सिंह काफी व्यथित हुए थे और इसी के कारण अपना कॉलेज छोड़ वो आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।