गर्भवती को नहीं मिला इलाज, अस्पताल के गेट पर दम तोड़ा
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उपचार न मिलने पर गर्भवती महिला ने महिला अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दिया। पीड़ित परिवार प्रसूता को समय से उपचार दिलाने के लिए अधिकारियों से गुहार करता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। महिला की मौत के बाद परिवारीजन शव को लेकर घर चले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कबीरनगर गली नंबर पांच निवासी राजा शंखवार की पत्नी गुड्डी देवी (35) को सुबह करीब 5:30 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गुड्डी नौ माह की गर्भवती थीं। परिवारीजन करीब छह बजे ई-रिक्शा से उन्हें प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां तैनात चिकित्सक और स्टाफ ने महिला को उपचार देने के नाम पर आगरा ले जाने की बात कही।
पति राजा काफी गिड़गिड़या और आगरा ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा लेकिन चिकित्सकों ने उसकी कोई मदद नहीं की। थक हार कर राजा ई-रिक्शा से पत्नी को प्राइवेट नर्सिंग होम ले गया। यहां चिकित्सक ने इतना खर्च बता दिया कि उसकी इलाज कराने की हिम्मत नहीं हुई। उसे कुछ नहीं सूझा तो वह ई-रिक्शा सहित महिला को आर्य नगर स्थित नगर विधायक मनीष असीजा के आवास पर ले गया।
समय रहते उपचार मिल जाता तो उसकी जान नहीं जाती
तब तक साढे़ सात बज चुके थे। विधायक बाहर आए और महिला की हालत देख उन्होंने सीएमएस से फोन पर महिला को अस्पताल में भर्ती करने को कहा। विधायक के कहने पर पति महिला को फिर महिला अस्पताल ले आया। महिला अस्पताल में उसे भर्ती किया जाता तब तक अस्पताल के गेट के सामने ईरिक्शा में ही उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की लेकिन इस पर भी अस्पताल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए।
वे शव को लेकर घर आ गए। राजा का कहना है कि यदि उसकी पत्नी को समय रहते उपचार मिल जाता तो उसकी जान नहीं जाती। उसकी मौत के लिए डाक्टर दोषी है। उसने महिला डाक्टर से काफी मिन्नत की थी। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा पाता।
महिला को परिवारीजन मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आए थे। चिकित्सक द्वारा उसको अस्पताल से भगाया नहीं गया था। महिला के परिवारीजनों ने चिकित्सक पर जो आरोप लगाए है, वे पूरी तरह से निराधार हैं। -उपमा सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फीरोजाबाद।