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एमएसपी पर सरकार पर बरसे तोगड़िया, बताया अन्नदाताओं के साथ अन्याय 

Wed, 04 Jul 2018 09:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 09:53 PM IST
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Pravin Togadia questioned the central government declaration of Minimum support price 

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण तोगड़िया ने केन्द्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के ऐलान पर सवाल उठाते हुए इसे अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया है। तोगड़िया ने जारी एमएसपी को किसानों के साथ वादाखिलाफी बताते हुए सभी फसलों पर तुरंत एमएसपी देने की मांग की। 

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बुधवार को मोदी सरकार के खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थम मूल्य देने के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष और भारतीय किसान परिषद के प्रणेता प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। तोगड़िया ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि केन्द्र सरकार को डेढ़ गुना एमएसपी खरीफ की कुछ फसलों पर दिया है, जबकि रबी कि फसलों पर नहीं दिया। 
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उन्होंने कहा कि किसानों की मांग थी कि ए2 नहीं, ए2 एफएल भी नहीं बल्कि पूरे सी2 से लागत गिन कर ही न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। उन्होंने कहा कि डेढ़ गुना भी किस इनपुट कॉस्ट का होना चाहिए। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
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तोगड़िया ने उदाहरण देते हुए कहा कि कपास पर अब एमएसपी 5150 रुपए हो गई है। सरकार ने लागत 3432 रुपए मान ली और उसका सरकार उसका डेढ़ गुना ऐसा दे रही है कि जैसे किसानों को दौलत बांट दी हो। उन्होंने कहा कि 3 साल पहले कपास की मार्केट कीमत 6 हजार रुपए थी और सरकार उससे भी कम 5150 रुपए एमएसपी देने की बात करती है। जबकि अगर सी2 गणना के हिसाब से इसकी एमएसपी 7 हजार रुपए से ऊपर जाती है।

वहीं उन्होंने मंगफूली के एमएसपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई एमएसपी 4890 रुपए है, जबकि सी2 गणना के मुताबिक यह 6,500 रुपए होनी चाहिए। तोगड़िया ने कहा कि हम मांग करते हैं कि सरकार सी2 गणना के हिसाब से सभी फसलों पर सभी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दे। 


उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि पहले हर साल एमएसपी बढ़ता था लेकिन सरकार चार साल तक इसे दबा कर बैठी रही और किसान आत्महत्या करता रहा। सरकार अनाज आयात करके किसानों को मिट्टी में मिलाती रही, उनकी जमीनें छीनती रही और उनके हक की बिजली बड़े कारखानों को देती रही और आज ऐसा ही छल किसानों के साथ सरकार ने किया है। 
 

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