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आरएसएस मुख्यालय में बोले प्रणब मुखर्जी- भारत की पहचान एकता और सहिष्णुता में है

Fri, 08 Jun 2018 04:40 AM IST
एजेंसी, नागपुर
एजेंसी, नागपुर Updated Fri, 08 Jun 2018 04:40 AM IST
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Pranab mukherjee speech Live updates at convocation of rss event in nagpur

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि अगर हम राष्ट्रीयता को असहिष्णुता के रूप में परिभाषित करने की कोशिश करेंगे तो हमारी पहचान धुंधली हो जाएगी क्योंकि यह बहुलवाद का उत्सव मनाने वाली भूमि है। वे बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष) के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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कांग्रेसियों के जबरदस्त विरोध के बीच इस कार्यक्रम में पहुंचे वरिष्ठ राजनेता मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता एक दूसरे में गुथे हुए हैं। इन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता है। हमारा समाज शुरू से ही खुला था और सिल्क रूट से पूरी दुनिया से जुड़ा था। यही नहीं, यूरोप से बहुत पहले ही हम राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुके थे और हमारा राष्ट्रवाद उनकी तरह संकुचित नहीं था। 
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यूरोपीय राष्ट्रवाद साझा दुश्मन की अवधारणा पर आधारित है, लेकिन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की विचारधारा वाले भारत ने पूरी दुनिया को अपना परिवार माना। प्राचीन काल में भारत आने वाले सभी यात्रियों ने इसकी प्रशासनिक दक्षता, ढांचागत सुविधा और व्यवस्थित शहरों की तारीफ की है।
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मुखर्जी ने कहा कि इस देश में इतनी विविधता है कि कई बार हैरानी होती है। यहां 122 भाषाएं हैं, 1600 से ज्यादा बोलियां हैं, सात मुख्य धर्म हैं और तीन जातीय समूह हैं लेकिन यही विविधता ही हमारी असली ताकत है। यह हमें पूरी दुनिया में विशिष्ट बनाता है। हमारी राष्ट्रीयता किसी धर्म या जाति से बंधी हुई नहीं है। हम सहनशीलता, सम्मान और अनेकता के कारण खुद को ताकतवर महसूस करते हैं। हम अपने इस बहुलवाद का उत्सव मनाते हैं।

जरूरी है संवाद

Pranab mukherjee speech Live updates at convocation of rss event in nagpur

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और देश को आगे ले जाने के लिए बातचीत बहुत जरूरी है। बिना संवाद के लोकतंत्र नहीं चल सकता है। हमें बांटने वाले विचारों की पहचान करनी होगी। हो सकता है कि हम दूसरों से सहमत हो और नहीं भी हों लेकिन किसी भी सूरत में विचारों की विविधता और बहुलता को नहीं नकार सकते हैं।

खुशहाली सूचकांक में पीछे क्यों

मुखर्जी ने सवाल उठाया कि आर्थिक मोर्चे पर शानदार उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद खुशहाली सूचकांक (हैपीनेस इंडेक्स) में हम 133वें नंबर पर क्यों हैं। इस मामले में प्रगति करने के लिए हमें कौटिल्य को याद करना चाहिए, जिनका एक संदेश संसद के गेट नंबर छह पर लिखा है। इसमें कहा गया है कि जनता की खुशी में ही राजा की खुशी है। विदेशी शासन के कारण लंबे समय तक हम दर्द में जिए हैं, लेकिन अब हमें शांति, सौहार्द्र और खुशी फैलाने के लिए संघर्ष करना चाहिए। 

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