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पीएम बोले, आरक्षण दलितों का अधिकार इसे कोई छीन नहीं सकता

Mon, 21 Mar 2016 12:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 21 Mar 2016 12:25 PM IST
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PM Narendra Modi lays foundation stone for BR Ambedkar National Memorial in Delhi
प्रधानमंत्री ने अंबेडकर के योगदान को किया याद - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली में बाबा साहेब अंबेडकर राष्ट्रीय मेमोरियल का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विज्ञान भवन में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए देश के सामाजिक उत्थान में बाबा साहेब के योगदान को याद किया।
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मोदी ने दलितों और अनुसुचित जनजातियों के आरक्षण को लेकर छिड़े विवाद पर बोलते हुए कहा कि यह दलितों का अधिकार है और इसे कोई छीन नहीं सकता। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब किसी एक जाति के नेता नहीं थे। वह सबके नेता थे। उन्होंने दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए कई सराहनीय कार्य किए। उन्होंने सभी लोगों के शिक्षित होने के लिए भी प्रेरित किया और उनके उत्थान के लिए हर वो संभव प्रयास किए जिसकी उन्हें आवश्यकता थी। उन्होंने लोगों से केवल शिक्षित होने के लिए नहीं बल्कि संगठित होने का भी आह्वाहन किया था।
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मोदी ने खुद को अंबेडकर का भक्त बताते हुए कहा कि जिस तरह से सरदार वल्लभ भाई पटेल ने राजनीतिक एकीकरण का काम किया ठीक उसी तरह से बाबा साहेब ने सामाजिक एकीकरण का काम किया। उन्होंने कहा, 'हम बाबा साहेब को दलितों का मसीहा बना के अन्याय करते हैं, बाबा साहेब को ऐसे सीमित न करें।' मोदी ने कहा कि वो अमानवीय घटना के खिलाफ आवाज उठाने वाले महापुरुष थे।
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सबने अपना कदम पीछे खींच लिया था

PM Narendra Modi lays foundation stone for BR Ambedkar National Memorial in Delhi
प्रधानमंत्री ने आंबेडकर की तुलना मार्टिन लूथर से की - फोटो : ANI
मंत्री परिषद से इस्तीफा देने की नौबत क्यों आई? हिंदू कोड बिल पर बाबा साहेब की अध्यक्षता में काम चल रहा था। प्रारंभ में कांग्रेस के सभी मुखिया साथ दे रहे थे लेकिन जब उसे संसद में लाने की बात आई और उसमें इस बात का खुलासा हुआ कि इसमें महिलाओं को समान अधिकार देने की बात कही गई है तो सबने अपना कदम पीछे खींच लिया। इसमें संपत्ति में अधिकार समेत कई बातें थी। मोदी ने कहा इसमें केवल दलित महिलाओं की ही नहीं बल्कि सभी जाति के महिलाओं के अधिकार की बात कही गई थी।

मोदी ने बताया कि उस वक्त की सरकार ने इसे मानने से इनकार कर दिया जिसकी वजह से उन्होंने मंत्री परिषद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि जो सरकार इसका समर्थन नहीं कर सकती उस सरकार में उनका कोई स्थान नहीं है। इसलिए उन्होंने मंत्री परिषद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आंबेडकर की तुलना किंग मार्टिन लूथर से करते हुए कहा, 'मैं बाबा साहेब को लूथर से बिल्कुल कम नहीं मानता।'

मोदी ने कहा बाबा साहेब अंबेडकर ने श्रमिकों के उत्थान के लिए कई काम किए। उन्होंने श्रमिकों के काम के लिए समय का निर्धारण किया। श्रमिक कानून के मुख्य रचयिता तो बाबा साहेब आंबेडकर ही हैं। उन्होंने उस वक्त यह नहीं देखा कि वह श्रमिक किस तबके से आता है। वह दलित है या नहीं इस बात को उन्होंने कभी तवज्जो नहीं दी। इसलिए बाबा साहेब केवल दलितों के नहीं बल्कि हम सबके नेता हैं।
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