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पीएम ने बताए देश के तीन दुश्मन: रावण दहन में शामिल हुए मोदी, बोले-सभी दल राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों

Tue, 20 Oct 2026 06:37 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 20 Oct 2026 06:37 PM IST
सार

विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित दशहरा समारोह में हिस्सा लिया और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि दशहरा केवल त्योहार नहीं, बल्कि भारत की प्राण ऊर्जा, अत्याचार और आतंक के अंत तथा असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

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PM Narendra Modi attends Dussehra celebrations at Delhi’s IP Extension
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

विजयदशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली के चरणों में नमन करते हुए देशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज भारत के हर कोने, गांव और शहर में भगवान श्रीराम की भक्ति और उनके आदर्शों की गूंज सुनाई दे रही है तथा पूरा देश रामलीला के उत्साह में डूबा हुआ है। देशभर में आयोजित रामलीलाएं भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनकी शिक्षाओं को जीवंत बनाए रखने की परंपरा का प्रतीक हैं। विजयादशमी का पर्व अत्याचार और आतंक के अंत की उद्घोषणा करता है तथा यह इस शाश्वत विश्वास को दर्शाता है कि अंततः सत्य की असत्य पर विजय होती है। इस दौरान पीएम मोदी ने देश के तीन दुश्मन भी बताए। 

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'आज भारत का कोना-कोना राममय'
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास... हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं है, ये भारत की प्राण ऊर्जा है। इस देश ने, इसकी संस्कृति ने और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है।ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षस राज रावण का अंत किया था। ये आस्था इसलिए भी है क्योंकि प्रभु राम ने हमें ऐसे आदर्श दिए जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय है।

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पीएम मोदी ने बताए देश के तीन दुश्मन
दशहरा कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे विचार समान हो, हमारी समितियां अर्थात् राष्ट्र की सभी संस्थाएं, सभी राजनीतिक दल... राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों। हमें इसी भावना पर चलना होगा, हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ना होगा।  देश को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता... ये देश के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा, रामराज्य का मतलब सबके न्याय का होता है और सत्ता का मतलब जनकल्याण होना चाहिए। समाज को बांटने वाले देश के दुश्मन हैं। इन्हें पहचानना होगा। हम सभी को देश के दुश्मनों से मिलकर लड़ना होगा। बुराईयों के खिलाफ सभी को साथ आना होगा। यह हमारे लिए त्यौहार नहीं भारत की प्राण ऊर्जा है।

'श्रीराम ने हर परिस्थिति में धर्म और सत्य का पालन किया'
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम न तो राजा बनने की संभावना से अत्यधिक प्रसन्न हुए और न ही वनवास जाने की परिस्थिति से दुखी। तमाम कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। उनका जीवन सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए।

'संकट में अपनी शक्ति और संसाधनों पर करें भरोसा'
भगवान श्रीराम के जीवन से हमें बड़ी सीख मिलती है कि संकट कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन, हमें दूसरों के भरोसे बैठकर इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए, अपने संसाधनों पर विश्वास करना चाहिए, अपने संकल्प को ताकत में बदलना चाहिए और कड़ी मेहनत के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए।

'विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ बढ़ें आगे'
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। आज भारत को भी इसी मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जोर दिया कि देश के सामने विकसित भारत के निर्माण और आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है, जिसे दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के जरिए पूरा किया जा सकता है। 


'गरीबों और वंचितों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रामराज्य ऐसी शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जहां किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो, न्याय की स्थापना हो और सभी को समान अवसर प्राप्त हों। ऐसी व्यवस्था में सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण सुनिश्चित करना होता है। उन्होंने जोर दिया कि गरीबों, वंचितों और समाज के कमजोर वर्गों की सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। 

ये भी पढ़ें: विजयादशमी: धूमधाम से हुआ रावण दहन, राष्ट्रपति मुर्मू, पीएम मोदी समेत कई दिग्गज दशहरा समारोह में हुए शामिल

'हमें अपनी क्षमता को पहचानना होगा'
भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा और चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, हमें दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमता को पहचानना चाहिए, अपने संसाधनों पर भरोसा करना चाहिए तथा दृढ़ संकल्प को शक्ति में बदलकर परिश्रम के माध्यम से समाधान खोजने चाहिए। आज देश को भी इसी मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा और विकसित भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जनकल्याण, समानता, आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामूहिक प्रयासों को अपना मार्गदर्शक बनाना होगा।

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