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विजयादशमी: पीएम मोदी ने संघ प्रमुख के संबोधन को सराहा, कहा- आपका बयान प्रेरणादायी; पंच परिवर्तन पर कही ये बात

Tue, 20 Oct 2026 11:09 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 20 Oct 2026 11:09 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरएसएस के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने विशेष रूप से ‘सेवा’ और ‘राष्ट्र निर्माण’ के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने का उल्लेख किया।

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PM Modi Praises RSS Chief Mohan Bhagwat statement on Vijayadashami, News in Hindi, Updates
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के दौरान परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का अत्यंत प्रेरणादायी संबोधन हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और समाज के चरित्र को सुदृढ़ करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से उल्लेखनीय था उनका वह जोर, जो उन्होंने 'सेवा' और 'राष्ट्र निर्माण' के प्रति उस प्रतिबद्धता पर दिया, जो हर आरएसएस स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने 'पंच परिवर्तन' के बारे में भी बात की और बताया कि किस प्रकार ये सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में सार्थक योगदान दे सकते हैं।
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अपने संबोधन में क्या बोले संघ प्रमुख?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के लिए नागपुर पहुंचे। नागपुर में श्री विजयादशमी उत्सव की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन के साथ हुई। इस उत्सव में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे और उन्होंने उत्सव में हिस्सा लिया। अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विस्मृति को दूर कर उस तत्व को भी स्पष्ट रूप से समझना पड़ेगा, स्वीकार करना पड़ेगा और उसके अनुरूप गुणवत्तापूर्ण जीवन का सभी आयामों में निर्माण करना पड़ेगा। देश की स्वाधीनता के लिए जितनी तपस्या और समर्पण हुआ, उससे कहीं अधिक की आवश्यकता अब पड़ेगी, परिस्थिति को देखते हुए यह ध्यान में आता है।
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पंच परिवर्तन और नई पीढ़ी पर चिंता
उन्होंने पंच परिवर्तन की बात करते हुए कहा कि पंच परिवर्तन की पांचों पहलों का (समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन) समाज के सभी वर्गों और स्तरों में स्वागत हुआ है। विश्व के अन्य देशों में भी इसकी आवश्यकता अनुभव की गई है। यह केवल एक वर्ष भर का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन में आचरण का परिवर्तन लाने वाली व्यवहार की शैली है। डॉ. भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचित-अनुचित का विवेक किए नई पीढ़ी ग्रहण करती है। उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और प्रतिबंध लागू किए हैं। हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेष तौर पर 'ओटीटी प्लेटफॉर्म' को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है। शासन-प्रशासन को इसका विचार करना चाहिए।

आरएसएस की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन की थी। इस वर्ष संगठन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में सरसंघचालक मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संघ के संस्थापक को पुष्पांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन के साथ विकास, सामाजिक सद्भाव और सोशल मीडिया पर सूचनाओं के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नशे की समस्या को भी गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए सरकार और समाज से मिलकर प्रयास करने की अपील की।


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आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने स्वयंसेवकों को दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस पर स्वयंसेवकों को बधाई दी। उन्होंने संघ की 100 साल की यात्रा को “सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव का उल्लेखनीय शतक” बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने संघ को वर्षों तक आगे बढ़ाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अनगिनत स्वयंसेवकों ने कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ समाज की सेवा की है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सेवा की यह भावना भविष्य में भी राष्ट्रीय विकास को मजबूती देती रहेगी।

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