सार्क से सहयोग की भारत की कोशिशों को आतंकी हमलों से बार-बार दी गई चुनौती : पीएम मोदी
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पाकिस्तान का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सार्क देशों के बीच अधिक से अधिक सहयोग की भारत की कोशिशों को आतंकवाद की घटनाओं और खतरे से लगातार चुनौती दी जाती रही। सार्क की स्थापना के 35वीं वर्षगांठ पर सार्क सचिवालय को लिखे खत में उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों को क्षेत्र में आतंकवाद और इसको समर्थन देने वाली ताकतों को खत्म करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। ऐसी कोशिशें आपस में विश्वास पैदा करेंगी और सार्क को मजबूत बनाएंगी।
पीएम मोदी ने अपने खत में लिखा कि सार्क ने प्रगति की है लेकिन बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। हमारी आपस में सहयोग की बढ़ती कोशिशों को आतंकी घटनाओं और खतरे से लगातार चुनौती मिली है। ऐसा माहौल सार्क की पूर्ण क्षमता को साकार करने की हमारे साझा मकसद में बाधा पैदा करते हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि सभी सदस्य देश आतंकवाद और इसे समर्थन देनी वाली ताकतों को हराने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। पिछले तीन साल से भारत ने खुद को सार्क सम्मेलनों से अलग रखा हुआ है। उसका कहना है कि सार्क के सदस्य देश पाकिस्तान से संचालित आतंकी गुटों से क्षेत्र की सुरक्षा को चुनौती मिल रही है।
उन्होंने कहा कि सार्क की स्थापना दक्षिण एशिया को एकीकृत और जोड़ने के मकसद से की गई थी। इस संगठन का लक्ष्य क्षेत्र के सभी देशों की प्रगति और विकास को बढ़ावा देना था। भारत लगातार इन मकसद को पूरा करने के लिए विभिन्न उपायों और कदमों का समर्थन करता रहा है। सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन आमतौर पर हर दो साल में वर्णमाला क्रम के हिसाब से सदस्य देश करते हैं। सम्मेलन की मेजबानी करना वाला देश इसकी अध्यक्षता करता है। आखिरी सार्क सम्मेलन 2014 में काठमांडू में हुआ था। इसमें पीएम मोदी ने भी शिरकत की थी।
2016 में सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में होना था लेकिन उसी साल 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उड़ी स्थित सैन्य कैंप पर आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद भारत ने इस सम्मेलन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। इस हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। भारत के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी इस्लामाबाद में होने वाले सम्मेलन में शामिल होने से मना कर दिया था। इसके चलते सम्मेलन को रद्द करना पड़ा था। इसके अन्य सदस्य देश मालदीव और श्रीलंका हैं।
पाक को उम्मीद है कि खत्म होगा सार्क प्रक्रिया का ‘अंतराल’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को उम्मीद जताई कि सार्क की सतत प्रगति में पैदा हो गए ‘अंतराल’ को जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा। दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क के 35वें चार्टर-डे पर अपने संदेश में इमरान ने कहा कि उनका देश क्षेत्रीय सहयोग की ताकत और सहयोग में दृढ़ विश्वास करता है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा, 8 दिसंबर उस दिन के तौर पर चिह्नित है, जब नेताओं ने दक्षिण एशिया की तरक्की और समृद्धि के लिए साथ मिलकर काम करने की शपथ लेते हुए सार्क चार्टर को लागू किया था। बता दें कि पहली बार सार्क सम्मेलन का आयोजन 8 दिसंबर, 1985 को ढाका में हुआ था।
आखिरी सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन 2014 में काठमांडू में किया गया था। इसके बाद वर्णक्रम के हिसाब से 2016 में सार्क सम्मेलन का आयोजन इस्लामाबाद में होना था, लेकिन पाक समर्थित आंतकियों के जम्मू-कश्मीर के उड़ी सैन्य शिविर पर हमले के बाद भारत ने इस सम्मेलन में भागीदारी से इनकार कर दिया था।
इसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी इस्लामाबाद में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से अभी तक सार्क सम्मेलन नहीं हो पाया है।