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दवाओं की कीमतों का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- निर्माता के फायदे के लिए क्यों काम कर रहा पूरा तंत्र?

Tue, 27 Oct 2026 03:53 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 27 Oct 2026 03:53 PM IST
सार

दवाओं की एमआरपी और खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किए हैं। कोर्ट ने दवा निर्माताओं को फायदा पहुंचाने वाले पूरे तंत्र और एनपीपीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। सरकार और शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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Pleas on overpricing of medicines: National Pharmaceutical Pricing Authority seems to be a "totally defunct" b
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत के बीच भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि पूरा तंत्र दवा निर्माताओं की मदद करने के लिए क्यों काम कर रहा है? केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि सरकार की नीति पूरे तंत्र को नियंत्रित करने की नहीं है।
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एनपीपीए की कार्यप्रणाली पर सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पूछा, पूरा तंत्र इन लोगों (दवा निर्माताओं) की मदद करने के लिए क्यों काम कर रहा है?  कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) पूरी तरह निष्क्रिय संस्था नजर आती है।
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पीठ देश में दवाओं की कीमतों से जुड़े मुद्दे को उठाने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। एमआरपी और खुदरा विक्रेता को मिलने वाली कीमत के बीच भारी अंतर का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, सरकार ऐसा होने दे रही है। यह सब सरकार की अपनी नजरों के सामने हो रहा है। पीठ ने पूछा, क्या इसे मनमाने ढंग से चलने दिया जाना चाहिए?
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भारत में दवाओं की कीमतें सबसे कम: केंद्र
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं। पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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कैंसर की दवाओं की कीमतों पर भी उठे थे सवाल
12 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि कैंसर रोधी दवाओं की खरीद और बिक्री के बीच के अंतर को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 फीसदी तक सीमित करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार का जवाब 'खुश होने लायक बिल्कुल नहीं है'। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि सरकार अन्य दवाओं की खरीद और बिक्री के बीच के अंतर को सीमित क्यों नहीं कर सकती?

इससे पहले, अस्पतालों की ओर से कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद केंद्र ने कहा था कि सरकार ने कैंसर रोधी दवाओं की खरीद और बिक्री के बीच के अंतर को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इससे मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
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