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Hate Speech: नफरत भरे बयानों की जांच और कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, जमीयत ने लगाई अर्जी
Fri, 31 Dec 2021 05:44 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 31 Dec 2021 05:44 PM IST
सार
याचिका में कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद का अपमान करना इस्लाम की नींव पर हमला करने के समान है और इस अर्थ में यह अत्यंत गंभीर प्रकृति का है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें पैगंबर मोहम्मद के व्यक्तित्व पर लगातार हमले और देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न लोगों द्वारा मुस्लिमों की मान्यताओं पर हमला करने वाली अपमानजनक टिप्पणियों से संबंधित घृणा अपराधों में अदालत की निगरानी में जांच और मुकदमा चलाने की मांग की गई है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपने अध्यक्ष मौलाना सैयद महमूद असद मदनी के माध्यम से याचिका दायर की है जिसमें केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह नफरत भरे भाषणों के संबंध में विभिन्न राज्यों द्वारा की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट के लिए केंद्र को निर्देश दे।
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इस्लाम की नींव पर हमला बताया
अधिवक्ता एमआर शमशाद द्वारा दायर की गई याचिका में देश में घृणा अपराधों से संबंधित सभी शिकायतों को संकलित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति के गठन के निर्देश और आदेश देने की भी मांगे हैं। याचिका में कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद का अपमान करना इस्लाम की नींव पर हमला करने के समान है और इस अर्थ में यह अत्यंत गंभीर प्रकृति का है क्योंकि इससे न केवल मुस्लिम लोगों को निशाना बनाया जाता है, बल्कि उनके विश्वास के आधार पर भी हमला किया जाता है।
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असहिष्णुता को भड़काने की संभावना रखते हैं
याचिका में कहा गया है कि इस तरह के भाषण दूसरे के विश्वासों के एक स्वीकृत आलोचनात्मक खंडन की सीमा से परे जाते हैं और निश्चित रूप से धार्मिक असहिष्णुता को भड़काने की संभावना रखते हैं। राज्य के साथ-साथ केंद्रीय अधिकारियों को इसे विचार की स्वतंत्रता के संबंध में असंगत मानना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह के भाषण हमारे राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करते हैं, जो हमारे संविधान की मूल संरचना का भी हिस्सा है। इस तरह के भाषणों के समर्थकों के साथ और इसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने चाहिए।
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