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Turbulance: हवाई यात्रा के दौरान झटका लगे तो न घबराएं, विमान को नहीं होता टर्बुलेंस से खतरा

Fri, 09 Jan 2026 04:50 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 09 Jan 2026 04:50 AM IST
सार

विमान यात्रा के दौरान अक्सर यात्री तेज झटका या टर्बुलेंस महसूस करते हैं। विशेषज्ञों ने एक रिपोर्ट में बताया है कि विमान में सफर के दौरान टर्बुलेंस महसूस होना सामान्य है और इसे लेकर डर निराधार है। 

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Plane Turbulence Do not panic if you feel a jolt during air travel does not pose a threat
इंडिगो विमान। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हवाई यात्रा के दौरान अचानक आने वाले झटके जिन्हें आम तौर पर टर्बुलेंस कहा जाता है अक्सर यात्रियों को डराने वाले अनुभव बन जाते हैं। विमान का हिलना, पेट में खालीपन महसूस होना, ट्रे पर रखे गिलास का छलक जाना और केबिन में असहज सन्नाटा, ये सभी दृश्य लगभग हर यात्री ने कभी न कभी देखे और महसूस किए हैं।
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क्या होती है टर्बुलेंस की वजह
हालांकि, विमानन विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार टर्बुलेंस उड़ान का एक सामान्य और प्राकृतिक हिस्सा है। इसे समझ लिया जाए, तो डर की जगह भरोसा पैदा हो सकता है। मौसम विज्ञान के अनुसार टर्बुलेंस का अर्थ है हवा की वह स्थिति जिसमें वायु प्रवाह शांत और समान न रहकर अव्यवस्थित, अनियमित और तेजी से बदलता हुआ हो जाता है। जैसे शांत धुएं की एक सीधी लकीर अचानक घूमती और बिखरती दिखे, वही प्रक्रिया हवा में बड़े पैमाने पर घटित होती है। हवा में यह अस्थिरता जमीन के पास भी हो सकती है और विमान की क्रूजिंग ऊंचाई से कहीं ऊपर भी। लेकिन हवाई यात्रियों को जो टर्बुलेंस सबसे अधिक महसूस होता है, उसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जाते हैं पर्वत, जेट स्ट्रीम और तूफानी मौसम।
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साइंटिफिक अमेरिकन और एविएशन वीक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जब तेज हवा किसी पर्वत श्रृंखला से टकराती है तो उसका पूरा प्रवाह सीधे आगे नहीं बढ़ पाता। कुछ हवा पहाड़ों के ऊपर से बह जाती है, जबकि कुछ नीचे दबकर ऊपर की ओर उठने लगती है। इससे वायुमंडल में लहरों जैसी संरचनाएं बनती हैं, जिन्हें माउंटेन वेव्स कहा जाता है। कई बार ये लहरें धीरे-धीरे और व्यापक रूप में फैलती हैं, लेकिन कभी-कभी यही तरंगें टूटकर तीव्र और अस्थिर वायु धाराओं में बदल जाती हैं।
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विशेषज्ञ बोले- टर्बुलेंस का डर निराधार
टर्बुलेंस को लेकर सबसे बड़ी आशंका यही होती है कि कहीं विमान को नुकसान न पहुंच जाए। विशेषज्ञ इस डर को निराधार बताते हैं। जॉर्जिया टेक की एयरोनॉटिक्स इंजीनियर मैरिलिन स्मिथ के अनुसार विमान के पंखों का झुकना खतरे का संकेत नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा है। पंखों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे लचीले हों और झटकों को सहन कर सकें। यदि वे कठोर होते तो विमान इतना भारी हो जाता कि उड़ ही न पाता। हर विमान को उड़ान से पहले और बाद में कठोर परीक्षणों से गुजारा जाता है।


सेंसर, एल्गोरिदम और हाई-टेक निगरानी
आज के विमानों में लगे सेंसर लगातार उन हिस्सों की निगरानी करते हैं, जहां थकान या घिसाव की संभावना अधिक होती है। जैसे ही कोई संकेत मिलता है, उस हिस्से को जांच या बदलने के लिए चिन्हित कर लिया जाता है। इसके साथ ही वैज्ञानिक पॉल शर्मन जैसे विशेषज्ञों के नेतृत्व में विकसित किए गए उन्नत एल्गोरिदम अब वास्तविक समय में टर्बुलेंस का बेहतर अनुमान लगाने में मदद कर रहे हैं। क्वांटस, एयर फ्रांस और लुफ्थांसा जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं, जबकि बोइंग इसे नए विमानों के लिए विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।

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