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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा: SIMI से ज्यादा खतरनाक आतंकी संगठन है PFI, खात्मा जरूरी

Mon, 26 Sep 2022 02:30 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 26 Sep 2022 02:30 AM IST
सार

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल और शाहिद अख्तर ने कहा कि एनआईए को इस एंटी टेरर सर्च ऑपरेशन में भारी कैश, डिजिटल डिवाइस, आपत्तिजनक दस्तावेज और तेजधार हथियार बरामद हुए हैं।

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PFI is a more dangerous terrorist organization than SIMI: Muslim Rashtriya Manch
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की बैठक - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

एनआईए के बड़े ऑपरेशन के बाद पीएफआई के खेमे में खलबली मची है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगा सकती है। इस बीच राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, भारत फर्स्ट और हिंदुस्तान फर्स्ट हिंदुस्तानी बेस्ट ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली में बैठक कर पीएफआई पर सरकार की पहल का समर्थन करते हुए इसे तत्काल बैन करने की मांग की है। मंच ने कहा कि जब भी इस देशद्रोही संगठन को लगता है कि उस पर कार्रवाई हो सकती है तब तब यह संगठन चूहे की तरह बिल में घुस जाता है। लेकिन जैसे ही इसे लगता है कि खतरा टल गया है वैसे ही यह समाज में जहरीले सांप की तरह खतरनाक बन जाता है। अतः मंच सरकार से मांग करती है कि इस आतंकी संगठन को तुरंत नेस्तनाबूद किया जाए। 

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की मांग
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल और शाहिद अख्तर ने कहा कि एनआईए को इस एंटी टेरर सर्च ऑपरेशन में भारी कैश, डिजिटल डिवाइस, आपत्तिजनक दस्तावेज और तेजधार हथियार बरामद हुए हैं। साथ ही इसमें 106 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कई नेता और पीएफआई सदस्य शामिल थे। मंच के संयोजकों का मानना है कि केंद्र सरकार, स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी की तरह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है क्योंकि छापेमारी के दौरान जो कुछ भी सामने आया है उसकी मदद से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का पूरा आधार बनता है। इसे लेकर दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह ने एक उच्चस्तरीय बैठक भी की थी जिसमें एनएसए चीफ अजीत डोभाल और एनआईए चीफ समेत तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। मंच का साफ तौर पर कहना है कि वह सरकार की कार्रवाइयों का समर्थन करता है और इस पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन पर अति शीघ्र कठोरतम कार्रवाई की मांग करता है। 
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उग्र इस्लामिक संगठन
मंच की तरफ से इस्लाम अब्बास और माजिद तालीकोटी ने कहा कि 2006 में पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया का गठन किया गया था और इसे तब से ही उग्र इस्लामिक संगठन माना जाता रहा है। इसके बावजूद यूपीए सरकार ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की। मंच ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भले ही पीएफआई का दावा है कि वह समाजसेवा और लोगों को उनका हक दिलाने के लिए काम करता है परंतु यह समाज को तोड़ने और वैमनस्य फैलाने का काम करता पाया गया है। यह संगठन 23 राज्यों में फैला है और इस संगठन की महिला विंग भी है। झारखंड में इस संगठन को बैन कर दिया गया था, जिसे हाई कोर्ट ने हटा दिया था, लेकिन 2019 में सरकार ने एक बार फिर इस संगठन को बैन कर दिया था, क्योंकि सरकार का कहना था कि इसके कुछ सदस्यों के लिंक सीरिया में मिले थे। 
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पीएफआई का कच्चा चिट्ठा
मंच के मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि जो आंकड़े और सबूत पाए गए हैं उसके मुताबिक सिमी से भी अत्यधिक खतरनाक उग्रवादी संगठन पीएफआई है जिसको तत्काल नेस्तनाबूद किया जाना जरूरी है। मीडिया प्रभारी ने पीएफआई की आतंकवादी संलिप्तता पर विस्तृत रूप से बातें रखी जिसमें कहा गया कि साल 2014 में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दावा किया था कि पीएफआई राज्य में 27 राजनीतिक हत्याओं और 86 हत्या की कोशिश के मामलों और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के 125 मामलों में शामिल रहे। दिनोंदिन पीएफआई की बढ़ती गतिविधियों के कारण यह आंकड़े अब काफी बढ़ चुके हैं। एर्नाकुलम में छात्र की हत्या के बाद केरल में भी 2018 में इस संगठन को बैन करने की मांग की गई थी। कर्नाटक में हिजाब प्रकरण में भी पीएफआई की भूमिका रही। सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के समय दिल्ली और उत्तर प्रदेश हिंसा में भी पीएफआई की सक्रियता की बात सामने आई थी। 

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने केरल में पीएफआई के लोगों के आईएसआईएस संपर्क की रिपोर्ट दी थी। यही नहीं, श्रीलंका ब्लास्ट में भी पीएफआई का जिक्र आया था। राजनीतिक हत्याओं, धर्म परिवर्तन के मामलों में भी पीएफआई की भूमिका सामने नजर आती रही है। 2017 में केरल पुलिस ने लव जिहाद के मामले सौंपे थे, जिसमें पीएफआई की भूमिका सामने आई थी। वहीं 2016 में कर्नाटक में आरएसएस नेता रूद्रेश की हत्या में पीएफआई का नाम आया था। देश के 23 राज्यों में पीएफआई नेटवर्क है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि केरल के कालीकट में इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। पीएफआई ने कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी, तमिलनाडु के मनिथा नीति पासराई, गोवा के सिटीजन्स फोरम, राजस्थान के कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसायटी, आंध्र प्रदेश के एसोसिएशन आफ सोशल जस्टिस के साथ मिलकर अपनी जड़ें बहुत मजबूत कर ली हैं। इसकी ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिम मसलों से संबंधित होती हैं। कई बार मुसलमानों को आरक्षण के लिए यह संगठन सड़कों पर उतर चुका है। साथ ही दलितों और आदिवासियों के साथ भी यह संगठन खड़ा होने का दावा करता है। मंच का स्पष्ट मानना है कि पीएफआई के खिलाफ जितने भी सबूत मिले हैं उससे साफ पता चलता है कि यह एक आतंकवादी संगठन है जिसकी फंडिंग विदेशों से होती है और जिसकी रैलियों में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं जो यह साबित करता है कि पीएफआई का कैरेक्टर भारत विरोधी है।  

सबूतों की कमी नहीं
हिंदुस्तान फर्स्ट हिंदुस्तानी बेस्ट के राष्ट्रीय संयोजक बिलाल उर रहमान और मोहम्मद महताब आलम ने कहा कि गृह मंत्रालय के पास एनआईए और आईबी द्वारा मुहैया कराए सबूतों का डॉजियर है, कई राज्यों ने पीएफआई की गतिविधियों के बारे में पुलिस रिपोर्ट भी गृह मंत्रालय को भेजी थी। संयोजकों ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों ने भी इस आशय का एलर्ट भेजा था। और जो खबरें अब तक देश और दुनिया तक पहुंची हैं और जितना आधार दिखाई दे रहा है उसको देखते हुए हिंदुस्तान फर्स्ट हिंदुस्तानी बेस्ट सरकार से अपील करता है कि जिस तरह सिमी पर प्रतिबंध लगाया गया था वैसे ही पीएफआई पर प्रतिबंध लगा कर सख्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है क्योंकि पीएफआई जो काम कर रही है वह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि सिमी का काम ही आगे बढ़ा रही है। यह एक बहुत ही खतरनाक और शातिर संस्था है जो लगातार देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त है। 

सिमी-पीएफआई कनेक्शन
भारत फर्स्ट की तरफ से राष्ट्रीय संयोजक शिराज कुरैशी और इमरान चौधरी ने सख्ती से अपनी बात रखते हुए कहा कि कानपुर में हिंसा के बाद से पीएफआई चर्चा में रही। कानपुर से पहले हिंदू नववर्ष पर गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा और झारखंड में जो दंगे हुए थे, उनमें भी पीएफआई के शामिल होने का दावा किया गया था। कई राज्य सरकारों ने दावे किए थे कि दंगों में पीएफआई के शामिल होने के सबूत मिले। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने खुद पीएफआई को बैन करने की बात कही थी। मौर्य ने कहा था, हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ है और सरकार इस पर बैन लगाएगी। मौर्य ने यह भी कहा था कि सिमी के कुछ सदस्य अब पीएफआई में शामिल हो गए हैं और जगह जगह हिंसा फैला रहे हैं। यूपी के तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने पीएफआई पर प्रतिबंध के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भी लिखा था। मध्य प्रदेश सरकार को भी खुफिया विभाग से सूचना मिली कि राज्य में कट्टरपंथी संगठन पीएफआई अपने पैर पसार रहा है। खबर के अनुसार, खुफिया विभाग की एक टीम राज्य में संगठन की गतिविधियों पर नजर रख रही है. अभी तक की जांच में पता चला है कि राज्य में पीएफआई के 650 से ज्यादा सदस्य हैं और यह संगठन राज्य में तेजी से बढ़ रहा है। जांच में आतंकी संगठन सिमी का भी पीएफआई से कनेक्शन मिला है।  


देश से गद्दारी एंटी इस्लामिक
मंच ने सवाल किया कि पीएफआई अगर इतना ही खतरनाक हो गया है तो उस पर अतिशीघ्र बैन क्यों नहीं लगाया जा रहा है? उसके बैंक अकाउंट फ्रीज क्यों नहीं किए जा रहे हैं? संपत्तियां क्यों नहीं कुर्क की जा रही हैं? इनके नेता, पदाधिकारी और प्रतिनिधियों पर हिंसक कार्रवाई में संलिप्तता के आधार पर कठोरतम कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? जबकि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकार से पूछा था कि क्या पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया गया है तो सरकार की ओर से कहा गया कि कुछ राज्यों में प्रतिबंधित है और केंद्र सरकार भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। अब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने भी खुल कर इस आतंक परस्त संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। भारत फर्स्ट का साफ तौर पर मानना है कि पीएफआई एक रेडिकल संस्था है जो मुसलमानों में कट्टरता फैलाकर विध्वंसक गतिविधियों में शामिल कराने की कोशिश करता है। पीएफआई का मकसद मुसलमानों में जहर फैला कर भारत विरोधी कार्रवाई करना है। मुसलमानों को समझना चाहिए कि इस तरह की हरकतों में संलिप्तता उन्हें न सिर्फ देशद्रोही की श्रेणी में ला खड़ा करती है बल्कि देश के साथ गद्दारी एंटी इस्लामिक भी है।  

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