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बीमार है पीएफआई संस्थापक अबूबकर: सुप्रीम कोर्ट ने साकेत मैक्स में भर्ती कराने की दी इजाजत; क्या हैं शर्ते?

Fri, 16 Oct 2026 06:30 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 16 Oct 2026 06:30 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए के तहत बंद पीएफआई के संस्थापक ई. अबूबकर को उनकी गंभीर बीमारियों के आधार पर दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत दे दी है। हालांकि, पीठ ने कहा कि इलाज और पुलिस सुरक्षा का पूरा खर्च याचिकाकर्ता को ही देना होगा। इसके अलावा, अस्पताल में बिना डिवाइस और बिना बाहरी मुलाकात के कड़े सुरक्षा इंतजाम रहेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मानवीय संवेदनाओं और सहानुभूति का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
 

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अबूबकर को सुप्रीम कोर्ट से राहत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आतंकी फंडिंग और देश के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अबूबकर को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया है कि उन्हें यह राहत सख्त शर्तों के साथ दी जा रही है।
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शीर्ष अदालत ने किस आधार पर दी राहत?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि न्याय करते समय अदालतों को मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में कानून के पालन के साथ-साथ थोड़ा सा सहानुभूति का भाव भी मिलाना जरूरी होता है। शीर्ष अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की उम्र और उसकी गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है।
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अस्पताल में भर्ती के लिए क्या शर्तें तय हुईं?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अबूबकर को दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। इलाज का पूरा खर्च अबूबकर को खुद ही उठाना होगा। इसके अलावा, अस्पताल में उनके साथ परिवार का केवल एक सदस्य ही मौजूद रह सकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मरीज की देखभाल करने वाला कोई भी अटेंडेंट अपने साथ कोई भी आपत्तिजनक सामान या उपकरण नहीं ले जाएगा।
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एनआईए और जांच एजेंसियों का क्या रुख रहा?
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट के सामने सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं रखीं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि अबूबकर को केवल एक सप्ताह के लिए अस्पताल में भेजा जाए। एनआईए ने मांग की कि अस्पताल के कमरे में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की अनुमति न हो, किसी भी बाहरी व्यक्ति को मिलने न दिया जाए और कमरे के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहे, जिसका खर्च भी आरोपी ही देगा।

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अबूबकर पर क्या-क्या आरोप?
इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, पीएफआई के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सदस्यों ने भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और वर्ष 2047 तक भारत में इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की एक बड़ी आपराधिक साजिश रची थी। एनआईए का आरोप है कि ये लोग देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग जुटा रहे थे और अपने कैडर को हथियार और कट्टरपंथ की ट्रेनिंग देने के लिए शिविर आयोजित कर रहे थे।


याचिकाकर्ता ने क्या दावा किया?
वहीं, 70 वर्षीय ई. अबूबकर ने अपनी याचिका में गिरते स्वास्थ्य को मुख्य आधार बनाया था। उसने कोर्ट को बताया कि वह पार्किंन्स बीमारी से पीड़ित हैं और पूर्व में उनके कैंसर का भी ऑपरेशन हो चुका है। इसके साथ ही उसने तर्क दिया कि एनआईए उसके खिलाफ कोई ठोस मामला बनाने में पूरी तरह नाकाम रही है, इसलिए वह गुण-दोष के आधार पर भी जमानत के हकदार हैं।

पीएफआई पर क्यों हुई कार्रवाई?
सितंबर 2022 में एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने देश भर के 11 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर पीएफआई से जुड़े दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। अबूबकर को भी 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था। इस राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के ठीक बाद, केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत पीएफआई और उससे जुड़े कई संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
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