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सेस से निकला दम, उस पर डीजल- पेट्रोल ने किया बेदम
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Jun 2016 09:46 PM IST
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फाइल फोटो
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जून की गर्मी का असर आम जनता की जेब पर दिख रहा है। पेट्रोल, जो कि बीते मार्च में 56.11 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, वह लगभग 9 रुपये बढ़ कर 65.60 रुपये पर पहुंच गया है वहीं डीजल 46.43 रुपये प्रति लीटर से साढ़े सात रुपये बढ़ कर 53.93 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
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रसोई गैस की कीमत भी इस महीने 21 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ गई। उसी तरह हवाई जहाज का ईंधन भी 3945.47 रुपये प्रति किलो लीटर महंगा हो गया है जिससे हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमत कम होने का फायदा उठाते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले दिनों घोषित परिणाम में रिकार्ड लाभ दिखाया है।
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बढ़े सेवा कर और ईंधन का खर्च बढ़ने से इस वर्ष गर्मी की छुट्टी मनाने का आम परिवार का सपना भी अधूरा रह सकता है। एक जून से निगेटिव लिस्ट में शामिल वातानुकूलित बसों की यात्रा को सेवा कर के दायरे में ला दिया गया है।
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इसके साथ ही सेवा कर पर कृषि कल्याण सेस लगने से रेल गाड़ी या बस में वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा, हवाई जहाज में यात्रा, रेस्टोरेंट में खाना, बैंक और बीमा कंपनियों से मिलने वाली सेवाएं, शादी-ब्याह और अन्य उत्सव महंगे हो गए हैं। कृषि कल्याण सेस लगने से सेवा कर की दर 14.5 फीसदी से बढ़ कर 15 फीसदी हो गई है।
देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयल के अध्यक्ष बी अशोक के मुताबिक पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्य सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों से निर्धारित नहीं होती बल्कि इसमें पेर्ट्रो इंधनों के अंतर्राष्ट्रीय मूल्य, इस पर लगने वाले कर, कच्चे तेल को लगने वाला भाड़ा, कर्मचारियों का वेतन आदि से भी निर्धारित होता है।
अभी सिर्फ कच्चे तेल क कीमतें की घट रही हैं, बांकी सभी मद में खर्च घटने के बजाय बढ़ ही रहा है। साथ ही सरकार बीते दो वर्षों के दौरान केन्द्रीय उत्पाद शुल्क मद में -नौ बार में- डीजल में प्रति लीटर 13.57 रुपये जबकि पेट्रोल में 11.77 रुपये का इजाफा कर चुकी है।
जब केन्द्र सरकार इन ईंधनों पर शुल्क बढ़ाती है तो राज्य सरकारें भी इस पर वैट बढ़ाने को प्रेरित होती है। इसलिए इस दौरान कई राज्यों ने पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट में बढ़ोतरी की। तेल कंपनियों का तर्क जो भी हो, लेकिन जनता तो ठगी महसूस कर रही है।
पेट्रोलियम पदार्थों, खास कर डीजल की मूल्य वृद्घि से किसानों से लेकर आम आदमी तक परेशान होता है। डीजल महंगा होने से एक ओर जहां किसानों सिंचाई एवं ट्रेक्टर चलाने का खर्च बढ़ जाता है, वहीं दूसरी ओर ट्रकों का भाड़ा बढ़ने की वजह से आलू-प्याज से लेकर तमाम खाद्य-अखाद्य वस्तुओं की परिवहन लागत बढ़ जाती है।
1 जून से हुआ महंगा-
पेट्रोल 2.58 रुपये प्रति लीटर
डीजल 2.26 रुपये प्रति लीटर
रसोई गैस 21 रुपये प्रति सिलेंडर
हवाई जहाज का ईंधन 3945.47 रुपये प्रति किलो लीटर सेवा कर पर लगाया गया 0.5 फीसदी का कृषि कल्याण सेस।
10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की गाड़ी पर 1 फीसदी का अतिरिक्त कर
2 लाख रुपये से अधिक की नगद में खरीद पर 1 फीसदी का अतिरिक्त कर