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जवान रहने के लिए बाघों को मारकर खाता था, पीता था उनका खून

Wed, 09 Mar 2016 12:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, खड्डा (कुशीनगर)
ब्यूरो/अमर उजाला, खड्डा (कुशीनगर) Updated Wed, 09 Mar 2016 12:39 PM IST
सार

  • बाघों को मारने के लिए अपनाता था खास तरीका।
  • बेच देता था खाल और बाघ के बाकी अंग।
  • हमेशा जवान रहने के लिए खाता था बाघ का मांस और पीता था उसका खून।

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person use to kill lion and eat that and drink blood
मृत बाघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाघों को मारकर उनकी खाल और अन्य अंगों की तस्करी के आरोप में कुछ दिनों पहले पुलिस और वन विभाग की टीम के हत्थे चढ़े हरि गुरो से पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं।

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हरि गुरो ने कबूल किया है कि बुढ़ापे से दूर रहकर हमेशा जवान बना रहने के लिए वह बाघ के मीट और खून को अपनी खुराक में शामिल करता था। बाद में खाल और बाघ के बाकी अंगों को बेच देता था। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने कुछ दिन पहले मारी गई मादा बाघ का शव भी जंगल से बरामद किया है।
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यूपी से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों को मार डालने की घटनाएं तेजी से बढ़ने पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कॉम्बिंग के दौरान जनवरी में बैरिया कला गांव से चंद्रदेव महतो और कृष्ण देव को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो बाघ की खाल और हड्डियां बरामद की गई थीं।
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इनसे मिले सुराग के आधार पर बिहार के ही रहने वाले भोला साह, सत्येंद्र ठाकुर, वंशराज, जितेंद्र तथा महराजगंज (यूपी) के प्रद्युम्न चौधरी को गिरफ्तार किया था। इसी क्रम में कुछ दिन पहले बिहार के गोनौली गांव का हरि गुरो छापामार टीम के हत्थे चढ़ा।

अब 72 घंटे की रिमांड पर लेकर शुरू की गई पूछताछ में बाघों के रक्त और मीट को आहार बनाने की बात सामने आने पर जांच टीम के होश उड़ गए। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने मंगलवार को गोनौली वनक्षेत्र के मुसहरिया नाले के पास से कुछ दिन पहले शिकार की गई मादा बाघिन का शव भी बरामद किया है।

उसने अब तक नौ बाघों को मारने की बात स्वीकार की है। पुलिस और वन विभाग की टीम उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश में है जो बाघों तथा अन्य वन्य जीवों के अंग और खाल के खरीदार थे।

बाघों के हत्यारे हरि गुरो को रिमांड पर लेकर की गई पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने के बाद एक बाघिन का शव भी बरामद किया गया है। इस गैंग में शामिल और लोगों तक पहुंचने की कोशिश है। वन्य क्षेत्र में सख्ती जारी रहेगी।
-अमित कुमार, डीएफ ओ, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व

गैंग में शामिल है हरि का कुनबा

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arrest - फोटो : demo pic

चिर युवा बने रहने की हसरत और अंगों की तस्करी की नीयत से बाघों की हत्या करने के आरोप में घिरे हरि गुरो के तार बिहार के अलावा यूपी, दिल्ली नेपाल के तस्करों से जुड़े थे। इनको बाघ या अन्य वन्य जीव की खाल तथा अंग सौंपकर मनमानी कीमत वसूलते थे। इस काम में उसके घर के कई सदस्य भी मददगार की भूमिका में शामिल रहते थे।

हरि गुरो की गिरफ्तारी के बाद से पूछताछ में लगी टीम को पता चला है कि वन्य जीवों की तस्करी में असल भूमिका दिल्ली, यूपी, नेपाल और बिहार में सफेदपोश की तरह रहने वाले कुछ लोगों की थी। हरि गुरो और उसके गैंग के अन्य लोग नेटवर्क में शामिल बड़े लोगों की मांग के आधार पर भी जानवर की तलाश पूरी करते थे।

प्रतिबंधित वन्य क्षेत्र में घुसपैठ करके कुछ ऐसे जानवरों को मारकर उनके शरीर में जहर मिला देते, जो दूसरे बड़े जानवरों का आहार बनते हैं। इनको निवाला बनाने वाले जानवर की हालत बिगड़ते ही कब्जे में लेकर हत्या कर देते थे और खाल तथा अन्य अंग अलग करके मनमानी कीमत पर बेचते थे।

बाघ के रक्त और मीट को आहार बनाने की नीयत पूरी करने के लिए हरि गुरो बाघों को आकर्षित करने वाले जानवर के मीट में तेज जहर की जगह कुछ ऐसे केमिकल मिलाता था कि बाघ का शरीर जहरीला हुए बिना उसे काबू किया जा सके।

उसकी पत्नी, दामाद, भाई सहित कुछ अन्य रिश्तेदारों के इस गैंग में शामिल होने की जानकारी के बाद उनकी भी तलाश की जा रही है। इस गैंग के हाथों मारे गए नौ बाघों में से पांच के अवशेष जांच टीम बरामद कर चुकी है।

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