Assam: गौरव गोगोई बोले- आम चुनाव के बाद लोग देखेंगे नया भारत, चुनावी चंदे से ध्यान भटकाने के लिए लागू हुआ सीएए
Assam: कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि 2024 के चुनावों के बाद देश के लोग एक नया भारत देखेंगे, जहां लोकतंत्र फलता-फूलता दिखेगा, संस्थान फिर से स्वायत्त होंगे और भाजपा या आरएसएस का नहीं बल्कि कानून का शासन होगा। कानून का शासन सभी एक लिए एक समान होगा।
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आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सियासी दलों के नेता एक-दूसरे पर हमला हैं। इस बीच, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि आम चुनाव के बाद देश के लोग 'नया भारत' देखेंगे। जोरहाट सीट से उम्मीदवार घोषित होने बाद गोगोई असम कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे।
गोगोई ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के समय पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, चुनावी बॉन्ड पर शीर्ष अदालत के फैसले से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया गया है।
पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, 2024 के चुनावों के बाद देश के लोग एक नया भारत देखेंगे, जहां लोकतंत्र फलता-फूलता दिखेगा, संस्थान फिर से स्वायत्त होंगे और भाजपा या आरएसएस का नहीं बल्कि कानून का शासन होगा। कानून का शासन सभी एक लिए एक समान होगा।
पार्टी की मंगलवार की घोषणा के मुताबिक गोगोई आगामी लोकसभा चुनाव जोरहाट सीट से लड़ेंगे। सीएए पर गोगोई ने कहा, फिलहाल संशोधित नागरिकता कानून एक ज्वलंत मुद्दा है। असम के मामले में हमारा असम समझौते के साथ एक विशेष संबंध है, जो नागरिकता चाहने वालों के लिए कट-ऑफ वर्ष 1971 तय करता है।
असम समझौते के मुताबिक, 25 मार्च 1971 को या उसके बाद असम में आने वाल सभी विदेशी नागरिकों के नामों का पता लगाया जाएगा, उन्हें मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा और उन्हें निर्वासित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस नेता ने कहा, संशोधित नागरिकता कानून असम समझौते का उल्लंघन करता है और इस कट-ऑफ वर्ष को 2014 तक बढ़ा देता है। हमें सरकार की दलील का कोई मतलब नहीं मिलता है।
गोगोई ने कहा, यह कहना काफी होगा कि भाजपा का एकमात्र प्रयास भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और चुनावी चंदे पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से जनता का ध्यान भटकाना है। उन्होंने भाजपा पर मणिपुर में दो समुदायों के बीच आक्रोश, नफरत और कलह के बीच बोने का आरोप लगाया और कहा कि सीएए को उससे भी ध्यान भटकाने के लिए लाया गया।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। वे (भाजपा नीत केंद्र सरकार) हकीकत में किसी भी शरणार्थी की मदद नहीं करना चाहते हैं। लेकिन वे असम को केवल भाषा और संस्कृति के आधार पर बांटना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे।