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पैलेट गन: छात्र आंदोलन के दौरान आरएएफ ने किया बलप्रयोग, इस हथियार का लाइबेरिया और मालदीव से क्या कनेक्शन?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 25 Jul 2026 08:21 AM IST
सार

  • 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान उग्र भीड़ पर सुरक्षाबलों के बलप्रयोग का मामला तूल पकड़ रहा है।
  • रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर दागे थे पैलेट गन, छात्रों में भारी गुस्सा।
  • दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से किया इंकार। सोशल मीडिया पर दावों की भरमार, वीडियो किए जा रहे शेयर।

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Pellet guns RAF force CJP Sansad March student protests delhi know connection of weapon to Liberia Maldives
पैलेट गन के इस्तेमाल पर बवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर दागी गई पैलेट गन को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों में भारी गुस्सा है। पैलेट गन के इस्तेमाल से कई छात्रों को चोट लगी है। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पैलेट गन को लेकर सरकार पर तीखा प्रहार भी किया। उन्होंने एक प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने पेश किया, जिसे पैलेट गन के छरें लगे हुए थे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इंकार किया है। पैलेट गन का इस्तेमाल सीआरपीएफ की दंगारोधी इकाई आरएएफ ने किया था। अंतरराष्ट्रीय समझौतों में ये हथियार प्रतिबंधित है।

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पैलेट गन का निर्माण डीआरडीओ की मदद से
1992 में आरएएफ की स्थापना के वाद इस्त्राइल और बेल्जियम से पैलेट गन खरीदी गई थी। अगर 23 यार्ड से पैलेट का फायर किया जाता है तो वह खतरनाक हो सकता है। छाती या चेहरे पर लगता है तो पीड़ित के लिए जान का जोखिम हो सकता है। आंखों की रोशनी जा सकती है। शुरुआत में विदेशों से आयात करने के बाद पैलेट गन का निर्माण डीआरडीओ की मदद से देश में ही शुरू किया गया था। इस्त्राइल और बेल्जियम से जब पैलेट गन खरीदी गई, तब इसकी कीमत तीन लाख रुपये थी। एक मल्टी वैरल लांचर में छह से आठ शेल डलते हैं। एक शेल से 30 छरें निकलते हैं। सीआरपीएफ के रिटायर्ड एडीजी एसएस संधू ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संधियों/ समझौतों में पैलेट गन पर प्रतिबंध है।
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विदेशी धरती से क्या कनेक्शन? किसान आंदोलन में भी इस्तेमाल
लाइबेरिया और मालदीव में भेजी गई थी यह गन, किसान आंदोलन में भी हुआ था इस्तेमाल पूर्व एडीजी संधू ने बताया कि आरएएफ ने 2012 में डीआरडीओ के तहत निर्मित यह गन लाइबेरिया और मालदीव में भेजी थी। वहां भेजे गए दंगारोधी उपकरणों की सूची में पैलेट गन भी शामिल की गई। सीआरपीएफ ने इन देशों के लिए पैलेट गन के अलावा वाटर कैनन और दूसरे उपकरण भी खरीदे थे। दिल्ली में हुए किसान आंदोलन और 2016 के दौरान कश्मीर में पत्थराबाजी की घटनाओं में इसका इस्तेमाल किया गया था। आरएएफ की 15 बटालियन हैं। एक बटालियन में 100 पैलेट गन होती हैं।
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राहुल ने प्रदर्शनकारी के घाव दिखाए कहा- हमारे छात्रों पर हमला बंद करें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को मीडिया के सामने 20 जुलाई को सुरक्षाकर्मियों के पैलेट गन से जख्मी प्रदर्शनकारी छात्र साहिल को पेश किया। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों ने छात्रों पर गोली चलाई और लाठीचार्ज किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान आपराधिक शिक्षा मंत्री हैं और शिक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने के प्रतीक हैं। इसलिए उन्हें हटाया जाना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।

साहिल की आंख को भी नुकसान पहुंचा है
प्रदर्शनकारी की चोट दिखाने के लिए उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाते हुए राहुल ने कहा कि साहिल की आंख को भी नुकसान पहुंचा है और वह एक आंख से देख नहीं पा रहा है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि साहिल की आंख बच पाएगी या नहीं। पुलिस का दावा झूठा है कि उन्होंने ऐसे किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस ने छात्रों पर जमकर अत्याचार किए। उन्होंने कहा कि ये हमारे देश का भविष्य हैं।


पुलिस बल में भर्ती के लिए परीक्षा दी थी
सरकार को झूठ बोलना बंद करना चाहिए: कांग्रेस नेता ने कहा कि साहिल ने पुलिस बल में भर्ती के लिए परीक्षा दी थी, लेकिन उसका पेपर लीक हो गया था। उसके (साहिल के) माता-पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से उसे यह मौका दिलाया था। सरकार को झूठ बोलना बंद करना चाहिए।

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