कश्मीर मामला : वेबिनार और वीडियो को भारत विरोध का हथियार बना रहा पाकिस्तान
- कश्मीर मसले पर दुनिया के सामने गलत तस्वीर पेश करने की कोशिश
- ज्यादातर ऑनलाइन कार्यक्रम में बैठते हैं पाकिस्तान के नेता व सीनेटर
- वेबिनार में शामिल होने वाले 'विशेषज्ञों' की उनके ही देश में कोई पूछ नहीं
विस्तार
जब दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ रही है तब पाकिस्तान भारत के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोलने में जुटा है। उसका नया हथियार बना है ऑनलाइन और सोशल मीडिया। हाल ही में कश्मीर के अलगाववादियों के कंधे पर बंदूक रखकर पाकिस्तान के बड़े राजनेता माने जाने वाले सीनेटर ने एक वेबिनार करवाई, जिसमें सिर्फ भारत के खिलाफ जहर उगला गया।
सबसे रोचक तो ये रहा कि करीब डेढ़ घंटे की इस वेबिनार में अलग-अलग देशों के जिन लोगों को बहुत बड़ा बताते हुए जोड़ा गया उनकी उनके देशों में भी कोई खास पहचान नहीं है। ज्यादातर स्वयंभू संगठनों के सर्वेसर्वा बताए गए। कई वक्ता तो कश्मीर के नाम पर बने किसी संगठन के अलग-अलग देशों के मुखिया बताए गये। हां, इन वेबिनार में पाकिस्तान के संवैधानिक पदों पर बैठे अथवा चुने गए नुमाइंदे भाग लेते हैं और वेबिनार में उनका ही कश्मीर पर और भारत के खिलाफ भाषण चलता है।
वेबिनार के बाद विदेशों में सक्रिय कश्मीरी अलगाववादी संगठन भाग लेने वालों के भाषणों के छोटे-छोटे वीडियो एक-एक कर जारी करते हैं। इसके साथ ही बड़ी-बड़ी प्रेस रिलीज भारतीय और विदेशी मीडिया को जारी करते हैं।
जानें कौन लेता है भाग
वर्ल्ड कश्मीरी अवेयरनेस नामक संगठन ने बुधवार को मीडिया को बताया कि बीते दिवस 'कश्मीर का डबल लॉकडाउन और दुनिया की प्रतिक्रिया' विषय पर वेबिनार हुई। इसमें मुख्य वक्ता थे पाकिस्तान की सीनेट की इंटरनेशनल रिलेशंस कमेटी के चेयरमैन सीनेटर मुशाहिद हुसैन सईद। बाकी जिन संगठनों के नाम हैं वे ज्यादातर यूके और कनाडा में कश्मीर के नाम पर धंधा चल रहे हैं। न उनको वहां की सरकारों और न ही संयुक्त राष्ट्र कोई भाव देता है। लेकिन, पाकिस्तान जरूर उनको पालता है।
वेबिनार पर जोर क्यों
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की कथित असेंबली के सदस्य अब्दुल राशिद तुराबी ने वेबिनार में इस तरह के आयोजन को बढ़ाना जरूरी बताया। उनका रोना है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत सरकार ने जो ऐतिहासिक कदम उठाया था, उसके बाद भी पाकिस्तान की बात दुनिया ने नहीं सुनीं। इसलिए वेबिनार और वीडियो के जरिए बात अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचानी चाहिए।