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पाक की अदालत ने निजी चैनलों को भारतीय फिल्में दिखाने की दी अनुमति
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 14 Feb 2017 07:24 PM IST
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पाकिस्तान की एक अदालत ने वैध लाइसेंसधारी निजी टेलीविजन चैनलों को देश के नियामक प्राधिकरण के साथ उनके समझौते की शर्तों के अनुरूप भारतीय फिल्में दिखाने की अनुमति दे दी है।
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पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्यूलेट्री अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने लाहौर उच्च न्यायालय के सामने रिपोर्ट पेश की थी जिसके मद्देनजर अदालत के मुख्य न्यायाधीश सैयद मंसूद अली शाह ने निजी टेलीविजन चैनलों को सोमवार को मंजूरी दे दी।
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लियो कम्युनिकेशन ने केबल टेलीविजन नेटवर्क पर भारतीय कार्यक्रम प्रसारित करने पर लगे प्रतिबंध को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी जिस पर अदालत ने अंतरिम आदेश पारित किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेलीविजन चैनलों को लाइसेंस एस्टैबलिश एंड ऑपरेट सैटेलाइट टीवी ब्रॉडकास्ट चैनल स्टेशन के उपबंध 7.2 (दो) के तहत भारतीय फिल्में प्रसारित करने की अनुमति होनी चाहिए।
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चैनलों को भारतीय नाटक प्रसारित करने की भी अनुमति हो
याचिकाकर्ता के वकील तफ्फजुल रिजवी ने अदालत में दलील दी कि चैनलों को भारतीय नाटक प्रसारित करने की भी अनुमति होनी चाहिए, क्योंकि वे भी पीईएमआरए के साथ हुए लाइसेंस समझौते के तहत ‘मनोरंजन’ की परिभाषा में शामिल हैं।
पीईएमआरए कानून अधिकारी ने इस दलील का विरोध करते हुए यह स्थापित करने के लिए समय मांगा कि ‘मनोरंजन’ में ‘भारतीय नाटक’ शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि चैनलों को पीईएमआरए के साथ उनके लाइसेंस समझौतों की शर्तों के अनुसार भारतीय फिल्में प्रसारित करने की अनुमति है। पीईएमआरए ने अपने अक्तूबर 2016 के आदेश में केबल नेटवर्क के जरिए चलने वाले पाकिस्तान के निजी चैनलों को भारतीय कार्यक्रम प्रसारित करने से रोक दिया था। दायर की गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश पीईएमआरए के नियमों एवं संविधान का उल्लंघन है।
पीईएमआरए कानून अधिकारी ने इस दलील का विरोध करते हुए यह स्थापित करने के लिए समय मांगा कि ‘मनोरंजन’ में ‘भारतीय नाटक’ शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि चैनलों को पीईएमआरए के साथ उनके लाइसेंस समझौतों की शर्तों के अनुसार भारतीय फिल्में प्रसारित करने की अनुमति है। पीईएमआरए ने अपने अक्तूबर 2016 के आदेश में केबल नेटवर्क के जरिए चलने वाले पाकिस्तान के निजी चैनलों को भारतीय कार्यक्रम प्रसारित करने से रोक दिया था। दायर की गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश पीईएमआरए के नियमों एवं संविधान का उल्लंघन है।