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पाक-चीन सरहद पर सख्त होगा पहरा, 15 नई बटालियन खड़ी करेगी सरकार
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:03 AM IST
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सरकार पाकिस्तान-चीन सीमा पर पहरा और सख्त करने की तैयारी में है। सरहद की रक्षा करने वाले दो महत्वपूर्ण बलों सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के लिए 15 नई बटालियनें खड़ी करने पर विचार हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार बीएसएफ के लिए छह और आईटीबीपी के लिए नौ नई बटालियनें खड़ी करने पर ‘सक्रियता से विचार’ कर रही है। प्रत्येक बटालियन में 1,000 ऑपरेशनल जवान और अधिकारी होते हैं।
बीएसएफ में मौजूद सूत्रों ने बताया कि बल की योजना नई इकाई को मंजूरी देकर संख्या बल बढ़ाने की है, ताकि उन्हें असम और पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से लगी सीमा पर तैनात किया जा सके। वहीं भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा, खासतौर पर पंजाब और जम्मू क्षेत्रों में सीमा की प्रभावी ढंग से पहरेदारी के लिए भी जवानों की आवश्यकता है।
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बीएसएफ में मौजूद सूत्रों ने बताया कि बल की योजना नई इकाई को मंजूरी देकर संख्या बल बढ़ाने की है, ताकि उन्हें असम और पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से लगी सीमा पर तैनात किया जा सके। वहीं भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा, खासतौर पर पंजाब और जम्मू क्षेत्रों में सीमा की प्रभावी ढंग से पहरेदारी के लिए भी जवानों की आवश्यकता है।
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चीनी सेना से होने वाली तकरार अहम वजह
Border Security
- फोटो : File Photo
बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई बटालियनों के गठन के बाद उनके लिए सटीक स्थान का आकलन किया जा सकता है। लेकिन बांग्लादेश और पाकिस्तान से लगे कुछ इलाके प्राथमिकता में बने रहेंगे, क्योंकि वे घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध प्रवास के लिए आसान माने जाते हैं।
आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘आईटीबीपी के लिए मूल योजना 12 नई बटालियन गठित करने की है लेकिन बल को निकट भविष्य में ऐसी नौ इकाइयों की जरूरत है।’ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना के साथ अक्सर होने वाली तकरार को आईटीबीपी की संख्या बढ़ाने की मुख्य वजह के तौर पर देखा जा रहा है।
आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘आईटीबीपी के लिए मूल योजना 12 नई बटालियन गठित करने की है लेकिन बल को निकट भविष्य में ऐसी नौ इकाइयों की जरूरत है।’ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना के साथ अक्सर होने वाली तकरार को आईटीबीपी की संख्या बढ़ाने की मुख्य वजह के तौर पर देखा जा रहा है।