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व्रत रखने वाले छात्रों को माला उतारने का आदेश?: तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष ने उठाए सवाल, कार्रवाई की मांग
Mon, 19 Oct 2026 10:28 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
आईएनएस, चेन्नई
आईएनएस, चेन्नई
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:28 AM IST
सार
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने दो स्कूलों में हिंदू छात्रों से धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों को धार्मिक माला हटाने और चूड़ियां छिपाने को कहा गया। नागेंद्रन ने स्कूल प्रमुखों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। पढ़ें पूरी खबर....
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तमिलनाडु में हिंदू छात्रों से भेदभाव का आरोप
- फोटो : एआई
विस्तार
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तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने थूथुकुडी और कन्याकुमारी जिलों के दो स्कूलों के प्रमुखों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन स्कूलों में हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने वाले छात्रों के साथ धार्मिक भेदभाव किया गया।
एक्स पर एक पोस्ट में, नागेंद्रन ने थूथुकुडी जिले के अथुर और कन्याकुमारी जिले के थक्कलई की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों की धार्मिक पहचान और पूजा की स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल रही है।
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष ने क्या दावा किया?
उनकी पोस्ट के अनुसार, अथुर के एक स्कूल के हेडमास्टर ने कथित तौर पर 30 से अधिक छात्रों को, जो नवरात्रि के उपलक्ष्य में व्रत रखे हुए थे। इसके साथ ही धार्मिक माला पहने थे। जिसे हटाने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के दौरान मारपीट भी हुई।
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इस पोस्ट में कथित मारपीट के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। दूसरी घटना के बारे में, नागेंद्रन ने दावा किया कि थक्कलई में एक हेडमिस्ट्रेस ने 10वीं कक्षा की एक छात्रा को अपनी चूड़ियां छिपाने के लिए कहा। उन्होंने इन दोनों घटनाओं को छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में दखलंदाजी के परेशान करने वाले उदाहरण बताया।
भाजपा नेता ने आगे क्या कहा?
भाजपा नेता ने तर्क दिया कि इस तरह की हरकतें बच्चों के विकास के शुरुआती वर्षों में उन्हें गहरी चोट पहुंचा सकती हैं और उनकी अपनी पहचान की भावना को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने इन कथित घटनाओं को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और स्कूल प्रशासन से तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग की।
विजय सरकार पर क्या आरोप लगाया?
नागेंद्रन ने आगे आरोप लगाया कि विजय सरकार के सत्ता में आने के बाद से धार्मिक दमन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने मंत्रियों पर धार्मिक पक्षपात करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके इस व्यवहार ने स्कूल प्रशासनों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
उनकी पोस्ट में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि के दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को समानता और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि स्कूलों को छात्रों की पहचान और उनके पूजा करने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
सरकार से क्या आग्रह किया?
उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शिक्षण संस्थान ऐसी जगह न बनें, जहां किसी विशेष धर्म के बच्चों को यह महसूस हो कि उनकी मान्यताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अथुर और थक्कलई की घटनाओं में शामिल स्कूल प्रमुखों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए, नागेंद्रन ने सत्ताधारी 'तमिलगा वेट्री कझगम' सरकार और उसके मंत्रियों से कहा कि वे उस रवैये को खत्म करें, जिसे उन्होंने 'एकतरफा धार्मिक दृष्टिकोण' करार दिया।
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एक्स पर एक पोस्ट में, नागेंद्रन ने थूथुकुडी जिले के अथुर और कन्याकुमारी जिले के थक्कलई की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों की धार्मिक पहचान और पूजा की स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल रही है।
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तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष ने क्या दावा किया?
उनकी पोस्ट के अनुसार, अथुर के एक स्कूल के हेडमास्टर ने कथित तौर पर 30 से अधिक छात्रों को, जो नवरात्रि के उपलक्ष्य में व्रत रखे हुए थे। इसके साथ ही धार्मिक माला पहने थे। जिसे हटाने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के दौरान मारपीट भी हुई।
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इस पोस्ट में कथित मारपीट के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। दूसरी घटना के बारे में, नागेंद्रन ने दावा किया कि थक्कलई में एक हेडमिस्ट्रेस ने 10वीं कक्षा की एक छात्रा को अपनी चूड़ियां छिपाने के लिए कहा। उन्होंने इन दोनों घटनाओं को छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में दखलंदाजी के परेशान करने वाले उदाहरण बताया।
भाजपा नेता ने आगे क्या कहा?
भाजपा नेता ने तर्क दिया कि इस तरह की हरकतें बच्चों के विकास के शुरुआती वर्षों में उन्हें गहरी चोट पहुंचा सकती हैं और उनकी अपनी पहचान की भावना को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने इन कथित घटनाओं को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और स्कूल प्रशासन से तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग की।
विजय सरकार पर क्या आरोप लगाया?
नागेंद्रन ने आगे आरोप लगाया कि विजय सरकार के सत्ता में आने के बाद से धार्मिक दमन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने मंत्रियों पर धार्मिक पक्षपात करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके इस व्यवहार ने स्कूल प्रशासनों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
उनकी पोस्ट में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि के दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को समानता और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि स्कूलों को छात्रों की पहचान और उनके पूजा करने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
सरकार से क्या आग्रह किया?
उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शिक्षण संस्थान ऐसी जगह न बनें, जहां किसी विशेष धर्म के बच्चों को यह महसूस हो कि उनकी मान्यताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अथुर और थक्कलई की घटनाओं में शामिल स्कूल प्रमुखों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए, नागेंद्रन ने सत्ताधारी 'तमिलगा वेट्री कझगम' सरकार और उसके मंत्रियों से कहा कि वे उस रवैये को खत्म करें, जिसे उन्होंने 'एकतरफा धार्मिक दृष्टिकोण' करार दिया।