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Politics: 'IPC-CrPC और साक्ष्य अधिनियम से जुड़ी मसौदा रिपोर्ट को अपनाने में जल्दबाजी', विपक्ष ने उठाए सवाल

Wed, 25 Oct 2023 03:52 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 25 Oct 2023 03:52 PM IST
सार

दो विपक्षी सांसदों ने पैनल के अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधेयकों की जांच की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। साथ ही पत्र के जरिए बैठक को स्थगित करने का भी आग्रह किया गया है।

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Opposition MPs question haste in adopting draft reports on bills to replace IPC, CrPC, Evidence Act
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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संसदीय स्थायी समिति में विपक्षी सांसदों ने गृह मामलों के तीन विधेयकों पर मसौदा रिपोर्ट को अपनाने में जल्दबाजी पर सवाल उठाया है। विपक्षी सांसदों ने आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए विधेयकों पर मसौदा रिपोर्ट को अपनाने में जल्दबाजी पर सवाल खड़े किए गए। समिति भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयकों की जांच कर रही है। जिसने एक नोटिस के माध्यम से अपने सदस्यों को सूचित किया है कि मसौदा रिपोर्ट 27 अक्तूबर को अपनाया जाएगा।

पत्र लिखकर बैठक को स्थगित करने की मांग
सूत्रों की माने तो दो विपक्षी सांसदों ने पैनल के अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधेयकों की जांच की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। साथ ही पत्र के जरिए बैठक को स्थगित करने का भी आग्रह किया गया है। जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए विपक्षी सांसदों ने कहा, उन्हें इन तीनों रिपोर्ट को पढ़ने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया है, जिसे 21 अक्तूबर को भेजा गया था। बता दें 30 सदस्यीय पैनल में भाजपा के 16 सदस्य हैं। 
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संसदीय पैनल का हिस्सा रहे एक टीएमसी सांसद ने कहा, इससे पता चलता है कि भाजपा को बंगाल की संस्कृति के बारे में कुछ भी समझ नहीं है। विधेयकों पर चिंता जताते हुए एक विपक्षी सांसद ने आरोप लगाया कि ये प्रस्तावित कानून, जो औपनिवेशिक युग के प्रक्रियात्मक कानूनों को बदलने के लिए हैं, और भी अधिक औपनिवेशिक हैं। गृह मामलों की 30 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति में अध्यक्ष सहित 16 भाजपा सांसद, कांग्रेस के चार, द्रमुक, टीएमसी, जद (यू) और बीजद के दो-दो और शिवसेना के एक सांसद हैं।
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बता दें गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा अध्यक्ष से विधेयकों को विस्तृत जांच के लिए पैनल को भेजने का अनुरोध करने के बाद तीनों विधेयकों की जांच करने और अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। अब तक हुई 11 बैठकों में पैनल ने विधि आयोग समेत कई विशेषज्ञों की राय ली।
 
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