500-1000 के नोट बंदः जानिए पीएम मोदी के फैसले पर किसने क्या कहा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जदयू ने किया मोदी के कदम का स्वागत
पांच सौ-हजार के नोट बंद किए जाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा है कि इससे नकली नोट के गोरखधंधे और ब्लैक मनी पर रोक लगेगी। आतंकियों को भारत और विदेश दोनों ही जगह से नकली नोट मिल रहा था। पुलिस के सामने भी यह मामला आया है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को अवैध घोषित करने के निर्णय का स्वागत और समर्थन किया है।उन्होंने कहा कि कालेधन को लेकर पीएम मोदी का फैसला काबिलेतारीफ है। नीतीश ने कहा कि लोगों को केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये इस कदम से थोड़ी समस्या तो जरूर होगी लेकिन यह हमारी भविष्य की आर्थिक मजबूती के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
प्रतिक्रिया, ट्विटर के माध्यम से
राधिका पांडेय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी
यह एक विचित्र फैसला है। इस फैसले के जरिए काले धन पर अंकुश लगाने से जाहिर है कि उनके पास अब भी इस समस्या का सही मूल्यांकन नहीं है। सरकार सोच रही है कि इस फैसले से सिस्टम से ब्लैकमनी पर काबू पा लिया जाएगा। इसे चरणबद्ध तरीके से करना चाहिए था।
एस. कांति घोष, मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारतीय स्टेट बैंक
यह एक अच्छा कदम है। यह एक सकारात्मक कदम है। हालांकि इसे लागू करने में थोड़ी चुनौती आएगी, लेकिन यह सही दिशा में उठाया गया कदम है।
एस.के. सिन्हा, सीएमडी, आम्रपाली आदया ट्रेडिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड
सरकार के इस फैसले से बुधवार को शुरू में बाजार थोड़ा गिर सकता है, लेकिन उसके बाद स्टॉक मार्केट अपनी स्थिति पर आ जाएगा क्योंकि बाजार में नगदी में कारोबार नहीं होता है, यहां सारा कुछ बैंक से माध्यम से होता है।
यूआर भट, प्रबंध निदेशक, डाल्टन कैपिटल एडवाइजर
इस फैसले का बाजार पर कोई खास असर नहीं होना चाहिए। इससे बाजार में मामूली प्रतिक्रिया होगी क्योंकि बाजार सिर्फ सफेद धन में अपना कारोबार करता है।
पीयूष गोयल, बिजली, कोयला, नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा व खान मंत्री
प्रधानमंत्री का यह फैसला क्रांतिकारी कदम है। ब्लैकमनी को रोकने की दिशा में यह महायज्ञ है और सबको भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहिम में साथ देना चाहिए।
हजार, पांच सौ के नोट खत्म करने का फैसला साहसिक कदम : राष्ट्रपति
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट खत्म करने के फैसले को साहसिक कदम बताया है। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मादी ने मंगलवार शाम को उनसे मुलाकात कर सरकार के इस फैसले की जानकारी दी।
राष्ट्रपति मुखर्जी ने सरकार द्वारा लिए गए साहसिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस कदम से काला धन और जाली नोट का खात्मा हो जाएगा। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह इस कदम से घबराएं नहीं और अपने पास रखे हजार और पांच सौ के नोट को बदलने के लिए सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें।
प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 500 के नीचे के सभी नोट यथावत चलन में रहेंगे। राष्ट्रपति ने लोगों से अपील की कि वह चलन से बाहर किए गए नोट को बदलने के सरकार द्वारा दिए गए अवसर का लाभ उठाएं। मोदी ने राष्ट्रपति को यह भी बताया कि इन नोट को हॉस्पिटल व कुछ खास उद्देश्य से सीमित समय के लिए इस्तेमाल करने देने की इजाजत होगी।
काले धन पर बनी एसआईटी ने फैसले का स्वागत किया
500-1000 के नोट पर रोक काला धन पर सर्जिकल स्ट्राइक : अधिया
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा है कि 500 और 1000 रुपये के नोट पर रोक काला धन पर एक तरह से सर्जिकल स्ट्राइक है। उन्होंने ट्वीट किया कि काले धन पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार की ओर से उठाया गया यह सबसे बड़ा और साहसिक फैसला है।
यह काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक है। वित्त सचिव अशोक लवासा ने भी कहा कि देश के सबसे बड़े खतरे पर यह सबसे बड़ा हमला है। उन्होंने ट्वीट किया कि लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में भागीदार बनने के साथ सहयोग करना चाहिए।
काले धन पर बनी एसआईटी ने 500 और 1000 रुपये के नोट पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया है। टीम ने कहा है कि इससे काले धन की समस्या से निजात पाने में सहायता मिलेगी। यह एक बड़ा और साहसिक फैसला है। एसआईटी के चेयरमैन जस्टिस एमबी शाह ने कहा कि यह बहुत अच्छा फैसला है।
यह एक साहसिक फैसला है। इससे काले धन की समस्या पर काबू पाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास काला धन है और जिसने सरकार की ओर से चलाई गई योजना के दौरान इसकी घोषणा नहीं की, वे ही इस फैसले से परेशान होंगे। उन्होंने कहा कि यह अच्छी चीज है क्योंकि काला धन रखने वाले समाज में कुछ ही लोग है। उन्होंने कहा कि इस समय सरकार की ओर से उठाया गया यह सबसे अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उठाना जरूरी था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वर्ष 2014 में सरकार ने काला धन मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। गौरतलब है कि सरकार की ओर से चलाई गई इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (आईडीएस) योजना के तहत लोगों ने 65,250 करोड़ रुपये के काले धन की घोषणा की थी। 30 सितंबर को यह योजना खत्म हो गई थी।
पिछले साल विदेश में काल धन रखने वालों के लिए ऐसी ही योजना चलाई गई थी। उसके तहत केवल 644 लोगों ने 2428 करोड़ रुपये के काले धन की घोषणा की थी।
500 व 1000 के नोट पर रोक का आभूषण उद्योग ने किया स्वागत
500 और 1000 रुपये के नोट पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले का आभूषण उद्योग ने स्वागत किया है। उसका कहना है कि आने वाले दिनों में करेंसी नोटों की तुलना में लोगों का विश्वास सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं की ओर अधिक बढ़ेगा। गीतांजलि जेम्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मेहुल चोकसी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से थोड़ी घबराहट बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था अस्थिर होगा, लेकिन कुल मिलाकर यह देश के लिए अच्छी पहल है।
उन्होंने कहा कि अब आभूषण उद्योग तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि लोग करेंसी नोट की तुलना में आभूषण पर ज्यादा भरोसा करेंगे। पीसी ज्वेलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बलराम गर्ग ने कहा कि देश में कुछ दिनों तक संकट की स्थिति रहेगी। अगर बुधवार को आप सब्जी खरीदना चाहते हैं और आपके पास छोटे नोट नहीं हैं तो फिर आप क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले का असर कुछ दिनों तक रहेगा, लेकिन लंबी अवधि खासतौर पर संगठित क्षेत्र के मद्देनजर देखें तो सरकार का यह फैसला काफी अच्छा है। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले का शुद्ध सोने की मांग पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा, जो आभूषण विक्रेताओं और निर्माताओं के लिए अच्छा है।
आल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) के चेयरमैन श्रीधर जीवी ने कहा कि सरकार के फैसले का सभी उद्योगों पर असर पड़ेगा। यह आभूषण उद्योग को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि आभूषण उद्योग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि इस फैसला का असंगठित आभूषण निर्माताओं और विक्रेताओं को कुछ परेशानी हो सकती है, लेकिन उससे उन्हें संगठित होने में मदद मिलेगी।
श्रीधर ने बताया कि देश में 70 से 75 फीसदी आभूषण विक्रेता और निर्माता असंगठित है, लेकिन 80 फीसदी कारोबार में 25 फीसदी संगठित आभूषण विक्रेताओं और निर्माताओं का योगदान होता है। उन्होंने कहा कि जीजेएफ सरकार के इस फैसले को लागू करने के लिए और समय की मांग नहीं करेगा। भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां हर साल 900 से 1000 टन सोने की खपत होती है और इसका एक बड़े हिस्से का आयात होता है।
बड़े नोट को चलन से बाहर करना काले धन पर कड़ा प्रहार : राजनाथ
बाबा रामदेव ने फैसले का स्वागत किया
योग गुरु बाबा रामदेव ने 500 और 1000 रुपये के नोट पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि वर्षों से वित्तीय पारदर्शिता के लिए चल रही उनकी लड़ाई आज फलदायी साबित हुई है।
बाबा रामदेव अगस्त 2010 से बड़े नोटों पर प्रतिबंध की मांग करते आए हैं। वह काला धन के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले शुरुआती कुछ लोगों में शामिल रहे हैं। उन्होंने आगे ट्वीट किया, ‘काला धन, भ्रष्टाचार और जाली नोट पर लगाम लगाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने पर नरेंद्र मोदी की सरकार को बहुत-बहुत बधाई।’ वह बुधवार को मीडिया से बात करने वाले हैं।
बड़े नोट को चलन से बाहर करना काले धन पर कड़ा प्रहार : राजनाथ
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के हजार और पांच सौ के नोट का समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से काला धन और जाली नोट का कारोबार बंद होगा। गृहमंत्री ने प्रधानमंत्री के फैसले को साहसिक बताया और कहा कि इससे भारत की भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को बल मिलेगा।
प्रधानमंत्री की घोषणा को चंद्रबाबू नायडू ने सराहा
प्रधानमंत्री की घोषणा को चंद्रबाबू नायडू ने सराहा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी की हजार और पांच सौ के नोट का चलन बंद करने की घोषणा का स्वागत किया है। नायडू ने प्रधानमंत्री के इस फैसले को सिस्टम से काले धन को बाहर करने वाला बड़ा कदम बताया।
प्रधानमंत्री की इस महत्वपूर्ण घोषणा के चंद मिनट के बाद नायडू ने एक वक्तव्य में कहा कि इस फैसले से न केवल काले धन पर झाड़ू फिरेगा, बल्कि भ्रष्टाचार का भी सफाया होगा। उन्होंने ऐसे साहसिक फैसले लेने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की। गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने तीन साल पहले 500 सौ और 1000 रुपये के नोट को समाप्त करने की मांग की थी। पिछले महीने उन्होंने अपनी मांग को दोहराते हुए मोदी को एक पत्र भी लिखा था।
बैंकों और उद्योग जगत ने बड़े नोट पर रोक का स्वागत किया
सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोट पर रोक लगाने के फैसले का बैंकरों और उद्योग जगत ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे साहसिक और क्रांतिकारी कदम बताया है। साथ ही उन्होंने इस बदलाव को सहज बनाए रखने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी कोशिश जल्दी से जल्दी एटीएम को चालू करना और ऑपरेशन सुचारु करना है।
सरकार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त समय दिया है। ग्राहकों को परेशानी से बचाने के लिए 24वों घंटे काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले भी बैंकिंग सेक्टर ऐसे बदलाव को देख चुका है। एटीएम और काउंटर से 500 और 1000 रुपये के नोट वापस लेने के लिए बुधवार को बैंक बंद रहेंगे।
आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर ने कहा कि समानांतर अर्थव्यवस्था पर चोट करने के लिए यह अब तक का सबसे अहम फैसला है। इससे भुगतान के औपचारिक चैनलों को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। इससे औपचारिक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी। वहीं एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा कि यह एक बड़ा सुधार है।
इसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था। कर देने से बचने के लिए पैसा दबाकर रखने वालों पर इसका व्यापक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नकदी लेनदेन पर काफी हद तक निर्भर रहने वाला रियल्टी सेक्टर ज्यादा प्रभावित होगा। इससे निर्माण गतिविधियां भी धीमी हो सकती हैं।
महिंद्रा समूह के उप चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया कि सफलता को औचक तत्व की जरूरत होती है। यह शानदार है कि इस मास्टर स्ट्रोक को गोपनीय रखा गया था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा है कि आज रात जिन्होंने बैंक लूटी वह खुद ही लूट गए।
सरकार के साथ उद्योग जगत
सीआईआई के प्रमुख नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि ऊंचे मूल्य वाले नोटों को चलन से हटाना नकद संपत्ति जमा करने से रोकने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। सरकार ने इस कदम से नकदी के रूप में मौजूद काली अर्थव्यवस्था पर निशाना साधा है।
सीआईआई प्रधानमंत्री और सरकार को इस कदम के लिए बधाई देता है। फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन नेओटिया ने मोदी सरकार के इस फैसले को बेहद साहसिक बताया है। इसका समानांतर अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा वहीं आतंकवाद को फंडिंग की कमर टूट जाएगी।
फिक्की सरकार के इस फैसले का पूरा समर्थन करती है। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डीके पंत ने कहा कि आय घोषणा योजना के बाद उठाए गए इस कदम का लक्ष्य काला धन पर काबू पाना है। अल्प अवधि में आम लोगों को थोड़ी परेशानी हो सकती है लेकिन लंबे समय में इससे फायदा है।