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एक कार्ड कर देगा आपके भाड़े की चिंता दूर, नीति आयोग कर रहा तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Sep 2018 07:30 PM IST
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केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के लिए ‘वन नेशन वन कार्ड’ योजना पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में इस कार्ड का हर तरह के यातायात में भाड़े के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत के मुताबिक, इसके तकनीकी आधारों पर विचार किया जा रहा है और इसकी रूपरेखा जल्द तैयार होगी। वह नीति आयोग और औद्योगिकी इकाई सीआईआई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फ्यूचर मोबिलिटी समिट 2018 को संबोधित कर रहे थे।
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एक कार्ड से परिवहन के तमाम साधनों के किराये का किया जा सकेगा भुगतान
नीति आयोग द्वारा तैयार की जा रही योजना में रेल, बस, जलयान और निजी व्यावसायिक वाहनों जैसे ओला, उबर सहित अन्य परिवहन के लिए भाड़े का भुगतान इस कार्ड के जरिये किया जा सकेगा। माना जा रहा है कि राज्यों से विचार-विमर्श के बाद वन नेशन वन कार्ड योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू करेंगे। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की दिशा में वन नेशन वन कार्ड की योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह डेबिट कार्ड की तर्ज पर होगा, जिसमें एक चिप और क्यूआर कोड होगा, जिससे कुछ ही पलों में भुगतान संभव होगा।
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ईंधन का वैकल्पिक स्रोत जरूरी
कांत ने कहा कि परिवहन क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास की रीढ़ है। खासकर घनी आबादी वाले भारत जैसे देश के लिए इस क्षेत्र का विकास बेहद जरूरी है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सड़क परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 4 फीसदी है, जो लगभग पूरी तरह पेट्रोल-डीजल जैसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भर है। ऐसे समय में जब पेट्रोलियम निर्यात का बिल लगातार बढ़ता जा रहा है, मोबिलिटी के विकास को लेकर भ्रम बढ़ रहा है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि फ्यूल के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की जाए और उनका इस्तेमाल बढ़ाया जाए।
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मोबिलिटी मार्केट में होंगे कई बदलाव
कांत ने कहा कि मोबिलिटी मार्केट में कई तरह के बदलाव आने की उम्मीद है। ऐसे में उम्मीद है कि बैट्री स्टोरेज स्पेस की वजह से मोबिलिटी मार्केट के सामने रुकावटें खड़ी हो सकती हैं, जिससे लगभग 300 अरब डॉलर के अवसर पैदा होने वाले हैं। स्टोरेज बैट्री उद्योग को मोबिलिटी उद्योग के भविष्य की मांग को पूरा करने की तैयारी करनी होगी और अक्षय ऊर्जा उद्योग द्वारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली बैट्री की भी काफी मांग होगी।
डाटा रखना होगा सुरक्षित : दुग्गल
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल के मुताबिक, इस कार्ड के लागू होने पर लोगों के आवागमन की निजी जानकारी का डाटा सुरक्षित रखना एक अहम चुनौती होगी। मौजूदा समय में आधार, पैनकार्ड और चुनाव आयोग का कार्ड लोगों के पास है। इसके अलावा भी कई कार्ड हैं, जैसे गरीबों के पास बीपीएल सहित अन्य कार्ड। ऐसे में वन नेशन वन कार्ड के आने पर इसे सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा।