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फिर बोला ड्रैगन, 'एनएसजी में एंट्री चाहिए तो एनपीटी पर हस्ताक्षर करो'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 22 Jul 2016 03:08 PM IST
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- फोटो : file photo
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एनपीटी यानी परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत को वजह बनाकर चीन लगातार भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने का विरोध कर रहा है। बुधवार को लोकसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत एनपीटी पर दस्तखत नहीं करेगा तो चीन का जवाब आ गया।
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चीन से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि चीन हमेशा से एनएसजी में शामिल होने के इच्छुक देशों के सामने अपना मत रखता आया है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि एनएसजी में एंट्री के लिए चीन नियम-कानून नहीं बनाता है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इस बात पर आमराय बन चुकी है कि परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं करने वाले देश को एनएसजी का हिस्सा नहीं बनाया जाए।
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लू ने कहा कि कोई भी देश खुद को एनपीटी से दूर नहीं रख सकता और न ही रखना चाहिए।
आखिर कब तक अड़ंगेबाजी में कामयाब होगा ड्रैगन?
बता दें कि पिछले दिनों चीन के अड़ंगे से भारत को एनएसजी में शामिल होने से चूक गया। इस मामले में अमेरिका समेत ज्यादातर देशों ने भारत का समर्थन किया था।
48 देशों में चीन समेत पांच देशों को छोड़कर सभी भारत के पक्ष थे। लेकिन एनएसजी में शामिल होने के लिए सभी सदस्य देशों का समर्थन जरूरी है, इसलिए लाख कोशिशों के बावजूद भारत एलीट सर्किल में एंट्री पाने से वंचित रह गया।
जानकारों की मानें तो आगे भारत के पास फिर से कोशिशों को अंजाम देने के मौके बचे हैं।
48 देशों में चीन समेत पांच देशों को छोड़कर सभी भारत के पक्ष थे। लेकिन एनएसजी में शामिल होने के लिए सभी सदस्य देशों का समर्थन जरूरी है, इसलिए लाख कोशिशों के बावजूद भारत एलीट सर्किल में एंट्री पाने से वंचित रह गया।
जानकारों की मानें तो आगे भारत के पास फिर से कोशिशों को अंजाम देने के मौके बचे हैं।