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Hindi News ›   India News ›   NRI girl Open Letter To PM Modi, A Question On Burhan Wani

कश्मीरी लड़की ने PM को लिखा खुला खत, बुरहान वानी पर किया सवाल

Tue, 02 Aug 2016 05:09 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 02 Aug 2016 05:09 PM IST
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NRI girl Open Letter To PM Modi, A Question On Burhan Wani
17 साल की फातिमा शाहीन अमेरिका में रहती हैं। - फोटो : PTI
कश्मीर मूल की 17 साल की एनआरआई लड़की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओपन लेटर लिखा है। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में रहने वाली फातिमा शाहीन ने अपने लेटर में आंदोलनकारी कश्मीर की आवाज को सुने जाने की सिफारिश की है। 
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फातिमा के पत्र का मजमूं कुछ यूं है। 

'आदरणीय प्रधानमंत्री, अगर हम कश्मीर के लोगों का ख्याल करते हैं, तो हमें घाटी में कम्युनिकेशन के साधनों को बंद कर देने का रास्ता नहीं ढूंढ़ना चाहिए, ताकि हम उन्हें स्वतंत्रता से वंचित कर सके। हमें उनकी आवाजें सुननी चाहिए। क्योंकि कश्मीर के सभी लोग इसकी मांग कर रहे हैं।'
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उन्होंने आगे लिखा है कि 'मैं 20 जुलाई को अपने एक रिश्तेदार के यहां कश्मीर आई और मैंने घाटी को जिस हालात में पाया वैसा पहले कभी सुना भी नहीं था।' 
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'कश्मीर की आवाज सुनिए प्रधानमंत्री जी'

NRI girl Open Letter To PM Modi, A Question On Burhan Wani
फाइल फोटोः श्रीनगर में तैनात सुरक्षा बल के जवान - फोटो : PTI
फातिमा ने अपने पत्र में सवाल किया है कि 'प्रधानमंत्री जी, मैंने टीवी की खबरों को देखा। फ्रांस के नीस शहर में हमला और तुर्की में मिलिट्री के तख्तापलट की कोशिश की खबरों को भी स्क्रीन पर जगह मिली है। इसके साथ ही दक्षिण भारत में बारिश की खबरें भी है, लेकिन कश्मीर की खबरें कहां हैं? महोदय, क्या यही कारण है कि मुझे कभी पता नहीं चल पाया कि इतने लंबे समय से मेरे शहर में क्या चल रहा है।'

'सबको कश्मीर की जमीन चाहिए'

NRI girl Open Letter To PM Modi, A Question On Burhan Wani
फाइल फोटोः श्रीनगर में ह‌िंसक प्रदर्शन - फोटो : PTI
उनका दावा है कि किसी को भी कश्मीर के लोगों का ख्याल नहीं है, लेकिन हर कोई इसकी जमीन चाहता है। 

फातिमा ने आगे लिखा, 'हर कोई कश्मीर को चाहता है, लेकिन इस जमीन के लोगों का किसी को ख्याल नहीं है। क्योंकि अगर हम कश्मीर के लोगों का ख्याल करते, तो हम यह नहीं देखते कि लोग बुरहान वानी को आतंकी कह रहे हैं या शहीद। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि एक मेधावी छात्र ने कलम ने बजाय बंदूक को क्यों चुना।'
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