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NPCIL: भारत में 2032 तक 18 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र होंगे स्थापित, एनपीसीआईएल ने दी जानकारी; यहां पढ़ें
Sun, 25 Feb 2024 06:57 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Sun, 25 Feb 2024 06:57 PM IST
सार
भारत में 13,800 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 18 नए परमाणु ऊर्जा रिएक्टर 2032 तक स्थापित करेगा। वर्तमान में एनपीसीआईएल 8,180 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 24 रिएक्टर संचालित करता है।
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NPCIL, एनपीसीआईएल,
- फोटो : NPCIL
विस्तार
भारत में 13,800 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 18 नए परमाणु ऊर्जा रिएक्टर 2032 तक स्थापित करेगा। जिससे परमाणु ऊर्जा की कुल ऊर्जा में हिस्सेदारी 22480 हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले सप्ताह गुजरात के काकरापार में दो घरेलू निर्मित 700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों को समर्पित करने के बाद न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने इसकी घोषणा की थी। वर्तमान में एनपीसीआईएल 8,180 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 24 रिएक्टर संचालित करता है।
प्रधानमंत्री ने 22 फरवरी को काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन (KAPS 3 और 4) की यूनिट 3 और 4 को राष्ट्र को समर्पित किया। पीएम मोदी की काकरापार यात्रा से दो दिन पहले 20 फरवरी को केएपीएस-4 को पश्चिमी पावर ग्रिड से जोड़ा गया था। एनपीसीआईएल ने कहा कि केएपीएस 3 और 4 (2 एक्स 700 मेगावाट) उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले सबसे बड़े स्वदेशी पीएचडब्ल्यूआर हैं।
एनपीसीआईएल ने कहा कि इन रिएक्टरों को एनपीसीआईएल द्वारा डिजाइन, निर्मित, चालू और संचालित किया गया है, जिसमें उपकरणों की आपूर्ति और भारतीय उद्योगों द्वारा अनुबंधों का पालन किया गया है, जो आत्मनिर्भर की ओर बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 21वीं सदी में बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ने वाली है और यह गर्व की बात है कि भारत इस उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भर है। इस अवसर पर मोदी ने काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन का भी दौरा किया और नियंत्रण कक्ष का दौरा किया।
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गौरतलब है कि रूसी सहायता से तमिलनाडु के कुडनकुलम में 1,000 मेगावाट के चार परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाए जा रहे हैं। चार 700 मेगावाट के घरेलू निर्मित पीएचडब्ल्यूआर राजस्थान में रावतभाटा (आरएपीएस 7 और 8) और हरियाणा में गोरखपुर (जीएचएवीपी 1 और 2) में होंगे।
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प्रधानमंत्री ने 22 फरवरी को काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन (KAPS 3 और 4) की यूनिट 3 और 4 को राष्ट्र को समर्पित किया। पीएम मोदी की काकरापार यात्रा से दो दिन पहले 20 फरवरी को केएपीएस-4 को पश्चिमी पावर ग्रिड से जोड़ा गया था। एनपीसीआईएल ने कहा कि केएपीएस 3 और 4 (2 एक्स 700 मेगावाट) उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले सबसे बड़े स्वदेशी पीएचडब्ल्यूआर हैं।
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एनपीसीआईएल ने कहा कि इन रिएक्टरों को एनपीसीआईएल द्वारा डिजाइन, निर्मित, चालू और संचालित किया गया है, जिसमें उपकरणों की आपूर्ति और भारतीय उद्योगों द्वारा अनुबंधों का पालन किया गया है, जो आत्मनिर्भर की ओर बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 21वीं सदी में बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ने वाली है और यह गर्व की बात है कि भारत इस उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भर है। इस अवसर पर मोदी ने काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन का भी दौरा किया और नियंत्रण कक्ष का दौरा किया।
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गौरतलब है कि रूसी सहायता से तमिलनाडु के कुडनकुलम में 1,000 मेगावाट के चार परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाए जा रहे हैं। चार 700 मेगावाट के घरेलू निर्मित पीएचडब्ल्यूआर राजस्थान में रावतभाटा (आरएपीएस 7 और 8) और हरियाणा में गोरखपुर (जीएचएवीपी 1 और 2) में होंगे।