अब रोबोट से भी हो सकेगा ट्रैफिक कंट्रोल
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रोबोट कई तरह के काम कर सकते हैं। हालांकि रोबोट इंसान नहीं है, लेकिन इंसानों से कम भी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप योजना को पंख लगे तो देश की ट्रैफिक व्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए द्राक्ष रोबोट भी तैयार हो गया है।
जो आने वाले दिनों में ट्रैफिक कंट्रोल करने में काम आएगा। यह रोबोट यूएस और जर्मनी के अधिकारियों को भी पसंद आया है जो ट्रैफिक रोकने के उपकरण बनाते हैं। मुंबई के गोरेगांव स्थित बांबे एक्जिविशन हाल में तीन दिन तक चली ट्रैफिक इन्फ्राटेक एक्सपो में द्राक्ष रोबोट के करतब दिखाए गए।
द्राक्ष रोबोट ट्रैफिक डायवर्ट करने में इंसानों से भी ज्यादा कारगर है। दिन हो या रात, गर्मी हो या बरसात हर मौसम में कारगर है। बैटरी से चलने वाला यह रोबोट फिलहाल, आगरा-जयपुर राजमार्ग पर मधुकोण में अपना काम कर रहा है। एक महीने में यह फिलीपींस में टोल नाके पर तैनात किया जाएगा। द्राक्ष रोबोट बनाने वाली कंपनी टीआरईईएस प्रा.लि. के प्रबंध निदेशक अर्पित गुप्ता बताते हैं कि जब भी हाईवे मरमत का काम होता है तो एक आदमी ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए झंडी लेकर खड़ा रहता है।
'रोबोट 24 घंटे अपनी ड्यूटी निभाता है'
किसी भी आदमी के लिए लगातार यह काम करना मुश्किल होता है। लेकिन, रोबोट 24 घंटे अपनी ड्यूटी निभाता है। अर्पित गुप्ता के अनुसार द्राक्ष रोबोट कंपनी का पहला मॉडल है। आगामी छह महीने में ट्रैफिक कंट्रोल करने वाला दूसरा रोबोट बनकर तैयार हो जाएगा जो ट्रैफिक पुलिस का काम करेगा।
इस रोबोट में समय तय होगा और उसके हिसाब से ट्रैफिक को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इतना ही नहीं, यह रोबोट मॉल और ढाबा आदि स्थानों पर गाड़ियों की पार्किंग में आदमी का काम करेगा। रोबोट अपने हाथ से गाड़ियों की पार्किंग के लिए निर्देश भी देगा।
मात्र 45 हजार रुपये की कीमत वाले द्राक्ष रोबोट को बाजार में उतारे अभी तीन ही महीने हुए हैं लेकिन इसका मार्केट वैल्यू काफी बढ़ा है। कंपनी के एमडी अर्पित गुप्ता जापान की छाबा यूनिवर्सिटी से एमटेक करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के स्टार्टअप योजना से प्रभावित हुए और अपनी कंपनी शुरू की। द्राक्ष रोबोट की यूनिट गाजियाबाद में है जबकि आफिस दिल्ली के दरियागंज से संचालित होता है।
आतंकियों को घुसपैठ से रोकेगा ‘दूरदर्शन’
मुंबई में आयोजित ट्रैफिक इन्फ्राटेक एक्सपो में दूरदर्शन नामक एक ऐसे कैमरे को भी काफी पसंद किया गया जो सीमा पर घुसपैठ करने वाले आतंकियों पर रोक लगाने में अहम योगदान दे सकता है। कंपनी का दावा है कि अत्याधुनिक कैमरे से लैस दूरदर्शन के जरिए आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने में भी मदद मिलेगी।
लेकिन, अगर इसका संपर्क रडार से हो जाता है तो हर सेकंड में सीमा पर घुसपैठ करने वालों की तस्वीर कंट्रोल रूम को भेजता रहेगा। कंपनी के बिजनेस हेड दर्शन पटेल ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने दूरदर्शन का प्रजेंटेशन किया गया है।
इस कैमरे की कीमत 20 लाख रुपये है जो दिन में पांच किलोमीटर और रात में तीन किलोमीटर की दूरी तक साफ तस्वीरें खींच कर कंट्रोल रूम को भेज सकता है।