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ईवीएम-वीवीपैट के औचक मिलान पर चुनाव आयोग को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च को मांगा जवाब
Sat, 16 Mar 2019 02:08 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 16 Mar 2019 02:08 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों के औचक मिलान को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। इन मशीनों का आगामी लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल किया जाना है। यह नोटिस 21 विपक्षी दलों की याचिका पर दिया गया है, जिन्होंने स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए 50 फीसदी ईवीएम व वीवीपैट का औचक मिलान कराए जाने की जरूरत बताई थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने आयोग को 25 मार्च को अगली सुनवाई पर जवाब के साथ अपने किसी अधिकारी को भी भेजने का आदेश दिया है।
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याचिकाकर्ता नेताओं ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को भी चुनौती दी है, जिसमें एक चुनाव क्षेत्र के किसी एक बूथ के ही वोटों का मिलान करने की बात है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह पूरे मतदान का महज 0.44 फीसदी ही साबित होगा। ऐसे में ये निर्देश वीवीपैट के उपयोग के उद्देश्य के विपरीत है। साथ ही याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि ईवीएम को संभावित छेड़छाड़ से बचाने के लिए सख्त नियम होने चाहिए।
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याचिका दायर करने वालों में चंद्रबाबू नायडू, अरविन्द केजरीवाल, शरद पवार, केसी वेणुगोपाल, डेरेक ओब्रायन, शरद यादव, अखिलेश यादव, सतीश चंद्र मिश्रा, एमके स्टालिन, टीके रंगराजन, मनोज कुमार झा, फारुक अब्दुल्ला, एए रेड्डी, कुमार दानिश अली, अजीत सिंह, मोहम्मद बदरूद्दीन अजमल, जीतन राम मांझी, प्रो. अशोक कुमार मिश्र आदि शामिल हैं।
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