{"_id":"58487e704f1c1b732a447fc2","slug":"notbandi-without-money-not-cure","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी: बैंक ने नहीं दिए पैसे, इलाज न मिलने से चली गई जान","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
नोटबंदी: बैंक ने नहीं दिए पैसे, इलाज न मिलने से चली गई जान
ब्यूरो/ अमर उजाला, गंगीरी (अलीगढ़)
Updated Thu, 08 Dec 2016 04:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थाना क्षेत्र के बूढ़ा गांव निवासी रवेंद्र सिंह की इलाज के अभाव में मौत हो गई। नए नोट न मिलने के कारण इस ग्रामीण को इलाज नहीं मिल पाया। इलाज कर रहे निजी अस्पताल ने पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया। मृतक के भाई का आरोप है कि इस अस्पताल ने आपरेशन के लिए 70 हजार रुपये बताए थे, इसमें से 55 हजार रुपये वह जमा करा चुका था। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया।
विज्ञापन
गंगीरी क्षेत्र के गांव बूढ़ागांव निवासी छोटेलाल ने बताया कि उसका भाई रवेंद्र सिंह (45) पुत्र नत्थूलाल काफी समय से पेट दर्द की समस्या से जूझ रहा था। अलीगढ़ के खैर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने भाई का चेकअप कराया तो डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने के लिए कहा था। इस पर 70 हजार रुपये का खर्च बताया गया था। 11 अक्तूबर को रवेंद्र को ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
विज्ञापन
तभी से वहां इलाज चल रहा था। वह 45 हजार रुपये अस्पताल में जमा कर चुका था। बाकी रुपये खुले या नए नोट के लिए वह बैंकों के चक्कर लगाता रहा मगर उसे नए नोट नहीं मिले। बाद में किसी तरह इंतजाम कर दस हजार रुपये और जमा कराए।
विज्ञापन
अस्पताल वालों ने बचे भुगतान के लिए पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया। रुपयों का इंतजाम नहीं हुआ तो तीन दिसंबर को रवेंद्र को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। परिजन मेडिकल कालेज भी लेकर गए। वहां से भी दो दिन पहले डिस्चार्ज कर दिया गया। बुधवार को रवेंद्र की मौत हो गई।