{"_id":"5fdd9746dab7e165cd22cb38","slug":"nobel-laureate-kailash-satyarthi-suggests-solutions-to-covid-19-crisis-in-new-book","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘कोविड-19: सभ्यता का संकट और समाधान’ जैसी पुस्तकें अन्य भाषाओं में भी प्रकाशित हों","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
‘कोविड-19: सभ्यता का संकट और समाधान’ जैसी पुस्तकें अन्य भाषाओं में भी प्रकाशित हों
Sat, 19 Dec 2020 11:34 AM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनिल पांडेय
Updated Sat, 19 Dec 2020 11:34 AM IST
विज्ञापन
नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक ‘कोविड-19: सभ्यता का संकट और समाधान’ का लोकार्पण भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने किया। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल थे।
विज्ञापन
पुस्तक में कोरोना महामारी के बहाने मानव सभ्यता की बारीक पड़ताल करते हुए यह बताने की कोशिश की गई है कि मौजूदा संकट महज स्वास्थ्य का संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्यता का संकट है। पुस्तक की खूबी यह है कि यह संकट गिनाने की बजाय उसका समाधान भी प्रस्तुत करती है।
विज्ञापन
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने इस पुस्तक को सामयिक बताया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं में भी अनुवाद किए जाने की जरूरत है। यह किताब ‘सामाजिक-राजनीतिक इंजीनियर’ के रूप को भी हमारे सामने प्रकट करती है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि कोविड संकट के दौर में इस पुस्तक का लिखा जाना मानव सभ्यता के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।
विज्ञापन
बच्चों की दशा को व्यक्त करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ की संस्थाओं ने अनुमान लगाया है कि कोरोना से उपजे आर्थिक संकट की वजह से 5 साल से कम उम्र के तकरीबन 12 लाख बच्चे कुपोषण के कारण मौत के शिकार हो जाएंगे।
महामारी से निपटने के लिए अमीर देशों ने अनुदान के रूप में कोविड फंड में 8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की थी, जिसमें उद्योग, व्यापार जगत और अर्थव्यवस्थाओं को भी सुधारना था। सत्यार्थी ने इस अवसर पर कोरोना वैक्सीन को मुफ्त में सर्वसुलभ कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि संकट से उबरने के लिए हमें करुणा का वैश्वीकरण करना होगा।