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'गांव में सेवा देने वाले डॉक्टरों को आरक्षण देना गलत'

Wed, 17 Aug 2016 08:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Wed, 17 Aug 2016 08:45 AM IST
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no reservation for rural doctors in pg medical courses: supreme court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Getty Images
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में 30 फीसदी आरक्षण नहीं बल्कि 30 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक मिलेंगे। 
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय को निरस्त कर दिया गया था जिसमें पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के दाखिले में 30 फीसदी सीटें ग्रामीण या दूर दराज क्षेत्र में सेवा देने वाले डॉक्टरों को आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने ग्रामीण या दूर दराज के इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में 30 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक देने की बात कही है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शहरी इलाकों में डॉक्टरों की संख्या तो बहुत है लेकिन ग्रामीण या दूर दराज इलाकों में डॉक्टरों की संख्या कम है। डॉक्टर वहां जाना नहीं चाहते हैं। राज्य सरकार केप्रयासों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में स्थित जन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। पीठ ने यह पाया कि  यह समस्या उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पूरे देश भर में है। ग्रामीण इलाकों में लिहाजा जन हित को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में सरकारी सेवा देने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन (इनसेंटिव) अंक दिया जाना चाहिए। 
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दाखिले में आरक्षण, मेडिकल कौंसिल के रेगुलेशन का उल्लंघन है

no reservation for rural doctors in pg medical courses: supreme court
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर - फोटो : amar ujala
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के निर्णय को निरस्त करने के आदेश को सही करार दिया है। पीठ ने इसे मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशनल रेगुलेशन, 2009 के रेगुलेशन-9 का उल्लंघन बताया है। हालांकि पीठ ने हाईकोर्ट में निर्देश में बदलाव करते हुए अकादमी सत्र 2016-17 से राज्य में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में रेगुलेशन-9 के तहत ग्रामीण इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को इनसेंटिव अंक देने की बात कही है।

हाइकोर्ट ने 28 फरवरी 2014 को एक सरकारी आदेश के जरिए राज्य में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिले में 30 फीसदी सीटें ग्रामीण इलाकों में तीन या इससे अधिक वर्षों तक सेवा देने वाले डॉक्टरों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया था। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार एक कार्यकारी आदेश के जरिए दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करना मेडिकल कौंसिल के रेगुलेशन का उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि एमसीआई रेगुलेशन के तहत पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स दाखिले में आरक्षण गलत है। 
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