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Bombay High Court: ड्यूटी के दौरान नींद लेने पर बर्खास्त CISF गार्ड को राहत नहीं, अर्जी खारिज

Wed, 23 Nov 2022 01:56 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 23 Nov 2022 01:56 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह सिपाही एक सार्वजनिक महत्व के प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए तैनात अनुशासित सुरक्षा बल का सदस्य था। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता व जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने कांस्टेबल की अर्जी खारिज कर दी।

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No relief to CISF guard dismissed for sleeping during duty
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

ड्यूटी के दौरान नींद निकालने पर बर्खास्त केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के गार्ड को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। वह नागपुर स्थित मौदा थर्मल पावर प्लांट में तैनात था। 

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हाईकोर्ट ने कहा कि यह सिपाही एक सार्वजनिक महत्व के प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए तैनात अनुशासित सुरक्षा बल का सदस्य था। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता व जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने मंगलवार को कांस्टेबल की अर्जी खारिज कर दी। सिपाही संतोष रमेश को अनुशासनहीनता और ड्यूटी पर नींद निकालने के आरोप में मार्च 2021 में सीआईएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। रमेश नागपुर स्थित ताप बिजली घर के एक वॉचटावर पर गार्ड के पद पर तैनात था।
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सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे रात की ड्यूटी के दौरान सोते हुए पाया था। इससे पूर्व भी रमेश को अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही के लिए चेतावनी दी गई थी। रमेश ने अपनी याचिका में यह कहते हुए राहत मांगी थी कि बर्खास्तगी की सजा उसके द्वारा किए गए कथित अपराध की गंभीरता के अनुपात में सही नहीं है।
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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिपाही रमेश के बारे में सहानुभूतिपूर्वक फैसला किया जा सकता था, यदि वह साबित करता कि नींद पर नियंत्रण नहीं कर पाने के कारण वह ड्यूटी के दौरान सोया था। कर्तव्य का निर्वहन करते समय लापरवाही का यह उसका अकेला मामला नहीं था। अतीत में भी उसे लापरवाह पाया गया था, लेकिन तब चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।

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