'अभिव्यक्ति के लिए सम्मान के हक को सूली पर नहीं लटकाया जा सकता'
- अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि कोई किसी को भी अपमानित कर सकता है
- सम्मान की सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी के लिए सम्मान से जीने के अधिकार को सूली पर नहीं लटकाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सम्मान का अधिकार जीने और निजी स्वतंत्रता जैसे बेहद महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों का ही हिस्सा है। 1860 के मानहानि कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार निरंकुश नहीं हैं।
संविधान में इसकी कुछ तर्कसंगत सीमाएं तय की गई हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 में मिला जीने का अधिकार भी बेहद अहम है और सम्मान से जीने का हक जीने के अधिकार का ही एक अभिन्न हिस्सा है। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी को भी अपमानित कर सकता है। पीठ ने कहा कि सम्मान की सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है। यह एक मानवाधिकार भी है। संविधान में भाईचारे के मत के तहत हर नागरिक से उम्मीद की गई है कि वह दूसरे व्यक्ति के सम्मान का ख्याल रखेगा। इसका मतलब यह भी नहीं है कि कोई किसी से अहमत नहीं हो सकता, मतभेद जाहिर नहीं कर सकता या अलग आवाज नहीं उठा सकता। इसका मतलब यह भी नहीं है कि सभी एक सुर में बोलें।
सभी को बोलने का और अभिव्यक्ति की आजादी का हक है। संविधान के तहत हर व्यक्ति भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए बाध्य है। यह संवैधानिक बाध्यता है। पीठ ने कहा कि विधायिका ने भी आपराधिक मानहानि कानून को खत्म करना उचित नहीं समझा। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मौलिक अधिकारों में संतुलन बनाते हुए आपराधिक मानहानि कानून अनुच्छेद (19)2 का उल्लंघन नहीं करता है। वह भी तब, जबकि संविधान में बी मानहानि शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
देश में मानहानि के चर्चित मामले
देश में मानहानि के चर्चित मामले
- महात्मा गांधी की हत्या का आरएसएस पर कथित आरोप लगाने से संबंधित मानहानि के मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 8 मई 2015 को भिवंडी की एक अदालत में पेश हुए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उनके खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी थी।
- डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार मामले में अरुण जेटली ने दिसंबर 2015 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत छह आप नेताओं के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया। उन्होंने 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।
- दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। केजरीवाल ने बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ अक्टूबर 2012 में एक रैली में शीला दीक्षित के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की थी।
- भाजपा नेता नितिन गडकरी ने 2014 में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि केजरीवाल ने जनवरी 2014 में एक संवाददाता सम्मेलन में भारत के भ्रष्टतम लोगों की सूची में उनका नाम शामिल कर उनका अपमान किया।
- दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप था कि नगर निगम चुनाव में विजेन्द्र गुप्ता ने शीला दीक्षित के खिलाफ असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया।
- मई 2013 में बिहार विधान परिषद सदस्य व जदयू नेता संजय सिंह ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पटना की एक अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया। लालू ने पटना में एक रैली के दौरान कथित तौर पर संजय सिंह एवं एक अन्य को नीतीश कुमार का एलसेशियन बताया था।
- मध्यप्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार उमा भारती ने दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने 1993-2003 के बीच सीएम पद का दुरुपयोग करते हुए 15 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया। दिग्विजय ने उमा भारती पर मानहानि का मुकदमा दायर किया।